जम्मू और कश्मीर के प्रसिद्ध स्की रिसोर्ट गुल्मर्ग में स्थित केबल कार, जिसे अक्सर पर्यटक पहाड़ों की सुंदर दृश्यों का आनंद लेने के लिए चुनते हैं, अचानक तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। यह घटना दोपहर के समय घटित हुई, जब काबिनों में सैकड़ों स्थानीय और विदेशी यात्रियों ने अपने सफर को अचानक रुकते देखा। खराबी के कारण केबल कार रुक गई और कई काबिनें मध्य-आकाश में फँस गईं, जिससे यात्रियों में असहजता और डर का माहौल बना। तुरंत स्थानीय अधिकारियों और भारतीय सेना को सूचित किया गया, और बचाव कार्य की तैयारी शुरू हुई। बचाव कार्य में पुलिस, राजमार्ग सुरक्षा बल, भारतीय सेना और रजत टूरिज्म डिपार्टमेंट की टीमों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। अत्यधिक सावधानी के साथ, बचाव दल ने प्रत्येक काबिन को क्रमिक रूप से खोलना शुरू किया। कई काबिनों में यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने के लिए लटकन (रॉप) और जिंजर (गैर-तकनीकी) उपकरणों का उपयोग किया गया। इस दौरान, मौसम की परिवर्तनशील स्थिति और उँचे बर्फीले ढलानों ने बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना दिया, परंतु बचाव दल की दक्षता और तत्परता के कारण सभी यात्रियों को शीघ्र ही सुरक्षित निकाला गया। संचालन के दौरान, कुल 65 काबिनें प्रभावित हुईं, जिनमें लगभग 300 से अधिक यात्री फँसे हुए थे। भारतीय सेना के विशेष बचाव समूह ने तेज़ी से दृश्य स्थल पर पहुँच कर, हवाई बचाव उपकरणों और लिफ्टिंग मेकैनिज़्म का उपयोग करके यात्रियों को नीचे उतारा। अधिकतम 80 पर्यटकों को तुरंत निकाला गया, जबकि शेष यात्रियों को क्रमिक रूप से सुरक्षित निकाला गया। अंततः सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा सुविधा तथा पानी, खाद्य सामग्री प्रदान की गई। इस घटना के बाद, गुल्मर्ग के केबल कार संचालन विभाग ने दुर्घटना की जाँच शुरू कर दी है। प्रारम्भिक रिपोर्ट दर्शाती है कि तकनीकी खराबी के कारण केबल सिस्टम में अचानक बाधा उत्पन्न हुई, जिससे कार रुक गई। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए नियमित रखरखाव और सुरक्षा जांचें कठोरता से लागू की जाएँगी। साथ ही, पर्यटकों को भी सलाह दी गई है कि ऐसी यात्रा के दौरान मौसम संबंधी अपडेट और सुरक्षा निर्देशों पर ध्यान दें। समग्र रूप से, इस बचाव ऑपरेशन ने भारतीय सुरक्षा बलों की तत्परता और टीमवर्क को उजागर किया। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर बचाव दल की प्रशंसा की और बताया कि उनके जीवन में इस प्रकार की मदद कितनी महत्वपूर्ण थी। इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर सुरक्षा उपायों को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और किसी भी तकनीकी समस्या के सामने शीघ्र प्रतिक्रिया देना यात्रियों की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।