भोपाल में दहेज से जुड़े अत्याचार के मामले में दोषी को सजा दिलाने की जाँच में दो बार ऑटॉप्सी करवाई गई, जिसके बाद तविषा शर्मा के परिवार ने अंतिम संस्कार का इंतज़ाम किया। यह घटना तब सामने आई जब 22 साल की तविषा, अपने पति के परिवार पर दहेज की मांगों के विरोध के कारण घर से भाग कर निर्वासन में चली गई और कई दिनों बाद उसकी मृत शरीर की तलाश में उसकी माता ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तुरंत साक्ष्य इकट्ठा कर कई व्यक्तियों को हिरासत में लिया, परन्तु प्रारंभिक जांच में कई मौखिक सबूत और दस्तावेज़ीय प्रमाण अस्पष्ट रहे, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में कई बाधाएँ उत्पन्न हुईं। डिटेक्टिव टीम ने दो बार ऑटॉप्सी का आदेश दिया, पहला ऑटॉप्सी बायोप्सी रिपोर्ट में तनाव और शारीरिक चोटों का संकेत मिला, जबकि दूसरा ऑटॉप्सी विशेष जांच एहतियाती उपायों के तहत कराई गई, जिससे मृत्युदण्ड के संभावित कारण को स्पष्ट किया जा सका। इन दोनों ऑटॉप्सी के परिणामस्वरूप यह स्पष्ट हुआ कि तविषा की मौत प्राकृतिक कारणों से नहीं हुई, बल्कि उसके शरीर पर गंभीर चोटों के कारण हुई। इस तथ्य ने मामले की गंभीरता को बढ़ा दिया और दहेज उत्पीड़न के खिलाफ सार्वजनिक तालियों की गहरी आवाज़ उठाने को प्रेरित किया। दूसरे ऑटॉप्सी के बाद, परिवार ने अंत्येष्टि के लिये आवश्यक अनुमति प्राप्त की और समान्य सांस्कृतिक रिवाजों के अनुसार जलाश्म में अंतिम संस्कार संपन्न करने की योजना बनाई। दोनों ऑटॉप्सी के पूर्ण होने के बाद ही दहेज मामले में दोबारा जांच के लिए विशेष न्यायालय ने आदेश जारी किया, जिससे तविषा के परिवार को न्याय की आशा मिली। इस बीच, न्यायपालिका ने इस मामले को विशेषाधिकारपूर्ण माना और सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं मोतू (Suo Moto) केस दर्ज कर ली, जिससे अगले सप्ताह न्यायालय में इस केस को सुनवाई करने का आदेश मिला। तविषा के परिवार ने कहा कि वह इस दुखद दिन को अपनी बेटी के याद में शोक के साथ याद रखेंगे और दहेज के खिलाफ समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिये इस त्रासदी को एक चेतावनी के रूप में प्रयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे न्याय के लिये संग्राम जारी रखेंगे और दहेज उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष में अपने बच्चे की कहानी को प्रेरणा का स्रोत बनाएँगे। निष्कर्षतः, दोबारा ऑटॉप्सी के बाद तविषा शर्मा का अन्त्यसंस्कार आज भोपाल के एक सार्वजनिक जलाश्म में संपन्न हुआ, जो पूरे देश में दहेज उत्पीड़न के विरोध में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया है। यह घटना न केवल हमारे सामाजिक बंधनों को उजागर करती है, बल्कि न्याय प्रणाली को भी सुदृढ़ करने की आवश्यकता को दर्शाती है। जितनी जल्दी इस मामले में कठोर सजा सुनाई जाएगी, उतनी ही तेजी से दहेज के खिलाफ लड़ाई में नई आशा की किरण प्रकट होगी।