संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रमुख सांसद और विदेशी मामलों के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार मार्को रूबियो ने अपने आगामी दिल्ली दौरे से पहले कहा है कि वे भारत को अपनी ऊर्जा निर्यात रणनीति में एक प्रमुख भागीदार बनाना चाहते हैं। रूबियो ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को पहचाना है और अमेरिका की कंपनियों को भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए नई राहें खोलने का इरादा जताया है। वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के लिए भारत का विशाल बाजार न केवल संभावनाओं से भरा है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को भी सुदृढ़ करेगा। रूबियो ने बताया कि वर्तमान में यूएस तेल, गैस और अक्षय ऊर्जा क्षेत्रों में भारत को निर्यात करने के अवसर सीमित हैं, लेकिन वे इस स्थिति को बदलने के लिए कई कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि यूएस की प्रमुख ऊर्जा कंपनियां भारत में निवेश करने, नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को साझा करने और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाने के लिए तैयार हैं। इस प्रक्रिया में अमेरिका की ऊर्जा निर्यात नीति को लचीला बनाते हुए, वैमनस्य के बिना विशिष्ट समझौते करने पर जोर दिया गया। रूबियो ने यह भी कहा कि वे भारतीय सरकार के साथ मिलकर नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देंगे, जिससे हरित ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार में मदद मिलेगी और दोनो देशों के पर्यावरणीय लक्ष्य हासिल होंगे। यह संकेत देना आवश्यक है कि रूबियो के इस बयान का मकसद केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि भारत-युएस के बीच व्यापक ऊर्जा सुरक्षा का निर्माण भी है। वे इस बात को दोहराते हैं कि भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देना न केवल दो देशों के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता और मूल्य नियंत्रण में भी योगदान देगा। रूबियो ने कहा कि वे भारत के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा साझेदारी को स्थापित करने हेतु नयी समझौतों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, जिसमें कच्चे तेल, लाइक्विड नेचर गैस, तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का समावेश होगा। यह कदम दोनों देशों को ऊर्जा असुरक्षा से बचाने और आपूर्ति श्रृंखला को विविध करने में सहायक होगा। रूबियो के इस विचारधारा के पीछे अमेरिकी कांग्रेस की भी बड़ी उम्मीदें निहित हैं। कांग्रेस के कई प्रमुख सदस्य भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों को निर्यात की सीमा बढ़ाने के लिए कानून में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस दिशा में, रूबियो ने कहा कि वे कांग्रेस के साथ मिलकर नीतियों को सुगम बनाने की कोशिश करेंगे, जिससे अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को स्थायी और लाभकारी बाजार की पेशकश की जा सके। अंत में, रूबियो ने इस संदेश को दोहराते हुए कहा कि "भारत महान साथी है और हम ऊर्जा सहयोग को विस्तारित करने के लिए तैयार हैं" और यह आशा जताई कि उनका दिल्ली दौरा इस सहयोग को नई दिशा देने वाला सिद्ध होगा।