आज राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सवेतीरथ में आयोजित व्यापक मंत्रिपरिषद् बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों से आगामी आर्थिक और सामाजिक सुधारों को तेज़ी से आगे बढ़ाने का स्पष्ट आदेश दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष की उपलब्धियों को संजोते हुए, अब देश को भविष्य की चुनौतियों के लिये तैयार करना आवश्यक है, इसलिए सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में नवाचार, डिजिटल तकनीक और सहजता को प्रमुखता देते हुए नई नीतियों का कार्यान्वयन करना होगा। इस दौरान उन्होंने ‘भूतकाल को भुलाकर भविष्य पर ध्यान दें’ का मंत्र दोहराया, जिससे प्रत्येक मंत्री अपने-अपने मंत्रालय में दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने को प्रेरित हुआ। मुख्य बिंदु इस प्रकार थे: प्रथम, आर्थिक सुधारों को तेज़ करने के लिये कर प्रणाली को सरल बनाना, विदेशी निवेश के लिये अधिक सुविधा प्रदान करना और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के लिये वित्तीय सहारा विस्तारित करना। द्वितीय, सामाजिक क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के लिये नवाचार-आधारित योजनाओं को लागू करना, जिससे नागरिकों को बेहतर जीवन मानकों का अनुभव हो। तृतीय, डिजिटल इंडिया को सुदृढ़ करने हेतु सभी सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन ले जाना, डेटा सुरक्षा को बढ़ाना और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँच सुनिश्चित करना। चैतुर्थ, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिये हरित ऊर्जा, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियानों को तेज़ी से आगे बढ़ाना। इन प्रमुख दिशानिर्देशों को मन में रखकर प्रत्येक मंत्री को अपने संबंधित मंत्रालय में कार्य योजना तैयार करने का अनुरोध किया गया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम सुधारों की गति को धीमा रहने दें तो आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशी विकास में बाधा उत्पन्न होगी। इसलिए सभी मंत्रियों को निर्देश दिया गया कि वे अपनी-अपनी टीमों के साथ मिलकर त्वरित निर्णय लेकर कार्यान्वयन को गति दें। उन्होंने विशेषकर ‘सहज जीवन’ को बुनियादी लक्ष्य बताया, जिससे नागरिकों को बुनियादी सेवाओं तक सुगमता से पहुंच प्राप्त हो सके। इस संदर्भ में विभिन्न राज्यों की सफलताओं को उदाहरण स्वरूप प्रस्तुत किया गया और सभी मंत्रियों को उन मॉडलों को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराने की सलाह दी गई। सत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी को यह याद दिलाते हुए कहा कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि नागरिकों की खुशी और समृद्धि से औपचारिक है। उन्होंने सभी मंत्रियों को पुनः प्रतिबद्धता की आशा जताते हुए कहा कि यह परिषद् राष्ट्रीय पुनरुत्थान की दिशा में एक नई ऊर्जा का स्रोत बनेगी और भारत को विश्व मंच पर अग्रणी बनाने की दिशा में निरंतर प्रगति सुनिश्चित करेगी।