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Breaking News: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया यीनत 2026 रद्दीकरण का मुद्दा
🕒 1 hour ago

नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) यूजी 2026 की परीक्षा को रद्द करने की मांग लेकर यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने आज दिल्ली के सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य नेशनल टेस्ट अथॉरिटी (NTA) को समाप्त कर, मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को पुनः स्वरूपित करना है। UDF का कहना है कि इस बार की परीक्षा में बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीकेज, भ्रष्टाचार और अनुचित सुविधाओं का प्रयोग हुआ, जिससे सामान्य अभ्यर्थियों के भविष्य में गंभीर क्षति हुई। अदालती याचिका में UDF ने कई मुख्य बिंदुओं को उजागर किया है। सबसे पहले उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने के कारण कई फॉर्मासिस्ट और रंगहीन माध्यमों से सम्बंधित लोग अनैतिक लाभ उठाकर निरंतर द्वेष सृजित कर रहे हैं। इस संदर्भ में कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि विभिन्न शहरों में अभ्यर्थियों ने बड़ी रकम देकर प्रश्नपत्र प्राप्त करने का प्रयास किया। इस प्रकार की लैटिन प्रथा ने पुनः एक बार मेडिकल प्रवेश प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है। दूसरा प्रमुख मुद्दा यह है कि NTA की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व की कमी है। UDF ने कहा कि NTA को एक स्वतंत्र निकाय के रूप में स्थापित किया गया था, परन्तु इसकी कार्यशैली में कई बार पक्षपात और अनुचित निर्णय हुए हैं। यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ स्थानीय डॉक्टर संघों ने इस परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक प्रदर्शन किए हैं, जिससे इस मुद्दे की संवेदनशीलता स्पष्ट हो गई है। अंत में, UDF ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह NTA को तत्काल विघटित कर, एक नई, अधिक सख्त और पारदर्शी संस्थागत ढांचा स्थापित करे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि यदि न्यायालय इस मांग को स्वीकार नहीं करता है तो सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में दीर्घकालिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, क्योंकि योग्य और योग्यतापूर्ण डॉक्टरों की कमी से रोगियों का इलाज प्रभावित होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रतीक्षा करते हुए, चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ और छात्र संगठनों ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक चर्चा को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। अगर अदालत ने UDF की मांगों को स्वीकार किया, तो यह मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में एक नया सवेरा ला सकता है, जहाँ सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके। अन्यथा, इस विवाद का निरंतर विस्तार देश की स्वास्थ्य सेवा में बड़े पैमाने पर कठिनाइयों को उत्पन्न कर सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 May 2026