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Breaking News: त्रम्प ने पाकिस्तान को ईरान मध्यस्थता में समर्थन दिया, लिंडसे ग्रैहम की “भरोसा न करें” टिप्पणी के बाद
🕒 39 minutes ago

अमेरिका के पूर्व अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पाकिस्तान को ईरान के साथ मध्यस्थता करने की भूमिका में समर्थन दिया, जबकि अमेरिकी सीनेट सदस्य लिंडसे ग्रैहम ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए "भरोसा न करें" का बयान दिया था। यह प्रतिक्रिया अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी चर्चा का कारण बनी, क्योंकि मध्य पूर्व में तनाव के बीच नई कूटनीतिक गठबंधन की संभावनाएं उभर रही हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि पाकिस्तान का इस दिशा में कदम उठाना "बहुत सराहनीय" है और वह इस प्रक्रिया को "अमेरिका के हित" के साथ संगत मानते हैं। इस बीच, ग्रैहम की टिप्पणी ने कई देशों को आश्चर्य में डाल दिया, क्योंकि वह पाकिस्तान द्वारा ईरान के कुछ सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर अवरुद्ध करने के प्रमाणों की ओर इशारा कर रहे थे। पाकिस्तान ने हाल ही में इस तथ्य की पुष्टि की कि उसने ईरानी सैन्य विमानों को अपने हवाई अड्डों पर शरण दी है, जिससे इन विमानों को अमेरिकी एरिल स्ट्राइक से बचाया जा सके। यह कदम न केवल पाकिस्तान-ईरान के बीच गहरा सहयोग दर्शाता है, बल्कि अमेरिकी पक्ष के लिए भी चिंताजनक संकेत बन गया है। कई अमेरिकी अधिकारियों ने इस विचार को व्यक्त किया कि यदि पाकिस्तान इस प्रकार के क़दम उठाता रहता है, तो वह मध्यस्थ के रूप में अपनी विश्वसनीयता खो सकता है। परन्तु ट्रम्प का समर्थन इस बात का संकेत देता है कि कुछ अमेरिकी राजनयिक वर्ग अभी भी पाकिस्तान को रणनीतिक साझेदार मानते हैं, विशेषकर जब मध्य पूर्व में तनाव बढ़ रहा है और शांति प्रक्रिया के लिए एक निष्पक्ष मध्यस्थ की आवश्यकता है। पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सकारात्मक कदम माना है, जबकि अन्य ने इस पहल को संभावित जोखिम के रूप में देखा। दक्षिण एशिया में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित शांति वार्ता में पाकिस्तान ने ईरान के साथ तनाव को घटाने के लिए कई प्रस्ताव पेश किए हैं, जिनमें आर्थिक प्रतिबंधों की समीक्षा और जल संसाधन साझेदारी शामिल है। हालांकि, अमेरिकी दूतावास ने इस बात पर स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान अपने एयरबेस पर ईरानी विमानों को छुपा कर अमेरिकी सुरक्षा को खतरा बनाता रहता है, तो उसे नई कूटनीतिक रणनीति अपनानी होगी। निष्कर्षतः, ट्रम्प का पाकिस्तान को मध्यस्थता में समर्थन देना एक जटिल कूटनीतिक परिदृश्य को उजागर करता है। जहाँ एक ओर यह समर्थन अमेरिका के भीतर अलग-अलग विचारधाराओं को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह पाकिस्तान को अपने विदेश नीति के मार्ग को पुनः परिभाषित करने का अवसर भी प्रदान करता है। भविष्य में यदि पाकिस्तान सफलतापूर्वक ईरान-इज़राइल या ईरान-उकेरैन विवाद को सुलझाने में मदद कर पाता है, तो उसकी मध्यस्थता विश्वसनीयता को पुनर्स्थापित किया जा सकता है। परन्तु इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ पारदर्शी संवाद और सुरक्षा के स्पष्ट मानदंडों का पालन अनिवार्य होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 13 May 2026