नई दिल्ली में गठित नरेंद्र मोदी सरकार ने हाल ही में बजट में मितव्ययिता को केंद्रीय बिंदु बनाते हुए कई पहलें शुरू की हैं। इन उपायों में सबसे प्रमुख है मंत्रालयीय यात्राओं पर कठोर प्रतिबंध और घर से कार्य (रिमोट वर्क) को अनिवार्य बनाना। यानी अब मंत्रियों को गैर-आवश्यक विदेश या देश के भीतर यात्रा करने से पहले मंजूरी लेनी होगी, और कई विभागों ने कर्मचारियों को अपने घर से काम करने की सुविधा प्रदान की है। यह कदम न केवल सरकारी खर्चे को घटाने के लिए है, बल्कि राष्ट्रीय ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा। इस नीति के पीछे सरकार का मुख्य लक्ष्य विदेशी मुद्रा बचत है। विदेश यात्राओं में होटलों, एयरलाइन टारिफ, और अन्य खर्चों की बड़ी रकम जुड़ी होती है, जिससे विदेशी मुद्रा का निकास बढ़ता है। साथ ही, महंगाई की मार से बचते हुए सरकार ने भारतीय जनता को सोना खरीदने से रोकने की सलाह भी दी है, जिसका उद्देश्य स्वर्ण आयात में कमी लाकर विदेशी मुद्रा आरक्षण में बढ़ोतरी करना है। इस दिशा में वित्त मंत्रालय ने नागरिकों को स्वर्ण आयात कम करने के लिए जागरूक किया है, जिससे लाखों डॉलर की बचत संभावना है। विदेशी ऊर्जा संकट के मद्देनज़र, सरकार ने तेल आयात पर भी नियंत्रण उपायों की घोषणा की है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति में बाधा आ रही है, इसलिए अब कार्यालयों में वर्क-फ्रॉम-होम प्रणाली को दोबारा लागू किया गया है। इस कदम से न केवल यात्रा लागत घटेगी, बल्कि ऊर्जा की खपत भी कम होगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने वाहन ईंधन दक्षता बढ़ाने के लिए कई सुझाव जारी किए हैं, जैसे गति नियंत्रण, टायर प्रेशर जांच, और अनावश्यक लोड घटाना, जिससे प्रति लीटर अधिक दूरी तय की जा सकेगी। इन सभी उपायों का समग्र प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान करने की दिशा में है। यदि मंत्रियों की यात्रा में कटौती, घर से काम करने की प्रवृत्ति, सोने की खरीद में कमी, और ईंधन बचत की सचेतनता को मिलाकर कार्य किया गया तो विदेश में खर्च की जाने वाली राशि में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। यह मितव्ययी नीति न केवल वर्तमान आर्थिक चुनौतियों का समाधान है, बल्कि भविष्य में वित्तीय जोखिमों को कम करने की दिशा में एक मजबूत बुनियाद भी रखती है।