विलक्षण राजनीतिक परिदृश्य में तमिलनाडु की नई सरकार ने अपना पहला बड़ा कदम रखा – मुख्यमंत्री के रूप में विंधु थलापति (जोसफ विजय) का फ़्लोर टेस्ट। यह परीक्षण, जो आम तौर पर सरकार की स्थिरता की कसौटी माना जाता है, ने AIADMK के भीतर गहरी विभाजन को उजागर कर दिया। पार्टी के दो मुख्य खंड, एक तो विजय की सरकार को पूर्ण सहयोग देने का इरादा रखते हैं, जबकि दूसरी ओर नेतृत्व के भीतर मौजूद शंकाओं और व्यक्तिगत हितों के कारण विरोध की लकीर खींच रहे हैं। इस धूमधाम के बीच, कई राजनीतिक विश्लेषकों ने यह प्रश्न उठाया है कि क्या विजय येडियुरप्पा की तरह अपने गठबंधन को मजबूत कर, विपक्षी दावों को कुचलते हुए अपनी सरकार को संपूर्ण नियंत्रण में ले सकते हैं। AIADMK के भीतर इस फूट को समझना आसान नहीं है। अली बारी के शासक बिंदु पर, पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि विजय के न्यायसंगत कार्यों की सराहना करते हुए भी वे निर्णय लेने में पारदर्शिता और राष्ट्रीय स्तर पर सामंजस्य की कमी को लेकर चिंतित हैं। वहीं, दूसरे समूह के प्रमुख प्रवक्ता ने खुलकर कहा कि वे पार्टी के भीतर एक नया दिशा-निर्देश चाहते हैं, जिसमें दल की स्वायत्तता और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी जाए। इस बीच, विजय ने सभी फॉर्मलिटीज़ को पूरा करने के बाद अपना कार्यकाल सुदृढ़ करने के लिए कई प्रमुख नेताओं को अपने क़रीब लाने का संकल्प जताया है, जिससे वह येडियुरप्पा के समान, अपने सहयोगी दल को बड़े पैमाने पर संतुलित कर सके। विजय के फ़्लोर टेस्ट के बाद तमिलनाडु में एक बड़ी चर्चा भी चल रही है—वोट भरोसा मत की कब तय होगी? वर्तमान में विपक्षी दलों ने अभी तक स्पष्ट तिथि नहीं बताई है, परंतु सबका मानना है कि यह प्रक्रिया जल्द ही तय हो जाएगी। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वास मत में जीत मिलने पर विजय की सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक बल मिलेगा और वह मैलेशिया समेत कई देशों से आर्थिक सहयोग के नए अवसरों को साकार कर सकेगी। इस बीच, दक्षिण भारत में चल रहे विकास कार्यों को देखते हुए कई राज्यों ने तमिलनाडु को अपने मॉडल के तौर पर मानना शुरू कर दिया है, जिससे विजय को ऐसे समय में अपना राजनैतिक संतुलन बनाये रखना अनिवार्य हो गया है। समाप्ति में कहा जा सकता है कि विजय का फ़्लोर टेस्ट सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि तमिलनाडु राजनीति में नई हवा का अहम प्रगतिशील कदम है। AIADMK की आंतरिक टकराव और विजय की गठबंधन रणनीति इस बात का संकेत देती है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों को अधिक सख्त गठबंधन और राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट नीतियों की आवश्यकता होगी। यदि विजय येडियुरप्पा की तरह अपने सहयोगियों को संगठित कर, विरोधी दलों को चतुराई से मात दे पाते हैं, तो तमिलनाडु में उनकी सरकार निस्संदेह एक स्थायी और विकासमुखी मार्ग पर चलेगी।