अंता-भयावह यू.एस.-ईरान टकराव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिये एक बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय के प्रमुख ने कहा कि देश के पास कच्चे तेल के ६० दिन और लिक्विड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के ४५ दिन का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति में कमी का कोई प्रश्न नहीं उठेगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच देश के आर्थिक तंत्र को स्थिर रखने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। देश के प्रमुख तेल आयातकों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में भारत ने कई दीर्घकालिक अनुबंधों के माध्यम से अस्थायी आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया है। खासकर पश्चिमी एशिया के प्रमुख तेल निर्यातकों से मिलते-जुलते समझौते ने भारत को सुलभ कीमतों पर कच्चा तेल उपलब्ध करवा दिया है। इसके अतिरिक्त, एलपीजी के मामले में भी घरेलू रिफ़ाइनरी क्षमता को बढ़ाने के लिये नई योजनाएँ लागू की गई हैं, जिससे बंदरगाहों पर स्टॉक लेवल में पर्याप्त मार्जिन बना रहता है। इससे घरेलू उपयोगकर्ताओं, उद्योगों और परिवहन खंड में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी, यह भरोसा देकर सरकार ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है। वैश्विक स्तर पर यू.एस. और ईरान के बीच तेज़ी से बढ़ते तनाव को देखते हुए कई देशों ने अपनी सुरक्षा नीतियों को पुनः समीक्षा कर रही हैं। इस माह के शुरुआती दिनों में पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को अपने हवाई अड्डों पर रहने की इजाज़त दी, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में नई हलचल देखी गई। लेकिन भारत ने इस तनाव को अपने ऊर्जा नीति के साथ नहीं जोड़ते हुए, निरंतर आपूर्ति सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय घर्षण के बावजूद भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मविश्वास होना चाहिए, ताकि आर्थिक विकास में कोई भी रुकावट न आए। अंत में यह कहा जा सकता है कि भारत ने इस जटिल अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अपने ऊर्जा भंडार को सुदृढ़ करने के लिये सक्रिय कदम उठाए हैं। कच्चे तेल और एलपीजी दोनों में पर्याप्त स्टॉक रख कर, देश ने संभावित आपूर्ति शृंखला व्यवधानों के विरुद्ध एक मजबूत ढाल तैयार कर ली है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य न केवल आने वाले संकटों से बचाव करना है, बल्कि आर्थिक स्थिरता और उद्योग के निरंतर विकास को भी सुनिश्चित करना है। इस प्रकार, भारत ने दिखा दिया है कि वह वैश्विक तनावों के बीच भी अपने नागरिकों के लिये ऊर्जा की स्थिर आपूर्ति को प्रमुख प्राथमिकता बना कर, एक विश्वसनीय और आत्मनिर्भर राष्ट्र की छवि स्थापित करने में सफल रहा है।