सृवेंदु अधिकारी की नई मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद, वे बंगाल के विकास को नई दिशा देने के लिए अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में कई अहम निर्णय ले चुके हैं। यह मीटिंग सिर्फ एक औपचारिक सभा नहीं थी, बल्कि एक ठोस कार्यसूची तैयार करने का मंच थी, जहाँ "डर को दूर, भरोसे को पास" का नारा सभी निर्णयों के पीछे प्रमुख भूमिका निभा रहा था। अधिकारी ने छह प्रमुख क्षेत्रों में बड़े कदम उठाए, जिनसे राज्य के सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य में सकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है। पहला बड़ा फैसला था सीमा सुरक्षा के लिए भारतीय सीमांतर बल (बीएसएफ) को जमीन प्रदान करना। राज्य ने बीएसएफ को 600 एकड़ से अधिक जमीन ट्रांसफर की स्वीकृति दे दी, जिससे सीमावर्ती बाड़ का निर्माण तेज़ी से पूरा होगा। यह कदम न केवल सीमा पर unlawful प्रवेश को रोकने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय किसानों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को भी दूर करेगा। दूसरा निर्णय था जनगणना (सेंसेस) कार्य को शीघ्रता से शुरू करने का आदेश, ताकि विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हों और लक्षित सहायता सही लोगों तक पहुँच सके। तीसरे क्रम में, अधिकारी ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के राज्य स्तर पर लागू करने की योजना को उद्घाटित किया। इस पहल के तहत गरीब और सामाजिक रूप से वंचित वर्ग के लोगों को निशुल्क उपचार, दवाइयाँ और स्वास्थ्य जांच की सुविधाएँ मिलेंगी। योजना की विस्तृत प्रक्रिया, आवेदन की रीढ़ और लाभों को स्पष्ट करने के लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया गया, जिससे आम जनता को आसानी से जानकारी मिल सके। चौथा कदम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शुरू करना था, जो 1 जून से लागू होगा। यह पहल महिलाओं की गतिशीलता को बढ़ावा देने और उनके संरक्षण में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पाँचवां निर्णय शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में आया। अधिकारी ने बताया कि राज्य में तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार किया जाएगा, जिससे युवाओं को उद्योग की मांग के अनुसार कार्य प्रशिक्षण मिल सके। अंत में, एक आर्थिक योजना के रूप में कृषि में नई तकनीकों का परिचय और किसानों को सस्ता बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराना प्रमुख रहा। इन सभी निर्णयों से यह स्पष्ट है कि सृवेंदु अधिकारी का प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसान कल्याण के सभी पहलुओं को संतुलित रूप से विकसित करना है। निष्कर्षतः, सृवेंदु अधिकारी की पहली कैबिनेट बैठक ने बंगाल के भविष्य के लिए एक स्पष्ट दिशा-रेखा स्थापित की है। "डर को बाहर, भरोसा अंदर" का नारा केवल शब्द नहीं, बल्कि कार्रवाई में बदला गया है। यदि इन निर्णयों को सुगम ढंग से लागू किया गया, तो राज्य न केवल सुरक्षा और सामाजिक विकास में प्रगति करेगा, बल्कि आर्थिक रूप से भी मजबूत बनेगा। जनता की आशा है कि ये कदम वास्तविक लाभ में परिवर्तित हों और बंगाल को प्रगति की नई ऊँचाइयों पर ले जाएँ।