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Breaking News: श्रीनिधि थरूर ने किया खुलासा: मतदाता विलोपन ने बीजेज़ में भाजपा, केरल में कांग्रेस को दिया बड़ा फायदा
🕒 1 hour ago

नई दिल्ली: भारत के वरिष्ठ दलीलकर्ता और विदेश मंत्री श्रीनिधि थरूर ने हाल ही में अपने अनेक इंटरव्यू में एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रकाश डाला—वोटर डिलीशन, यानी मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, जिसने पश्चिम बंगाल में भाजपा को और केरल में कांग्रेस को भारी लाभ पहुंचाया। थरूर ने कहा कि लगभग 34 लाख मतदाताओं की अपील पर विचार नहीं किया गया और केवल कुछ ही लोगों को ही सुनवाई का मौका मिला, जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि "सिंगल इंटेंट रजिस्ट्री" (SIR) के कारण कई वैध मतदाता अपने वोट दे पाने से वंचित हुए, जबकि इस त्रुटि ने कुछ क्षेत्रों में विपक्षी दलों को बड़ी आसानी से जीत हासिल करने में मदद की। थरूर ने अपने तर्क को तीन मुख्य बिंदुओं में व्यवस्थित किया। पहला, उन्होंने कहा कि बंगाल में मतदान के दौरान 34 लाख से अधिक मतदाता अपने नाम हटवाने की अपील कर रहे थे, परंतु चुनाव आयोग ने इन अपीलों में से अधिकांश को खारिज कर दिया। इस कारण से कई वैध मतदाता अपने अधिकार से वंचित हुए, जिससे भाजपा को कई वार्डों में अनावश्यक बढ़त मिली। दूसरा, केरल में कांग्रेस ने इस विलोपन के चलते कई वोटरों को अपने पक्ष में आकर्षित किया, क्योंकि कई बार विपक्षी उम्मीदवारों की समीपता में मतदाता हटाए जा रहे थे, जिससे कांग्रेस को अनुकूल परिणाम मिला। तीसरा, थरूर ने इस बात पर बल दिया कि SIR की गलतियों के कारण मतपत्रों में अनियमितता आई, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटे थे। उन्होंने कहा, "यदि इन त्रुटियों को ठीक किया जाता, तो हम शायद एक अलग परिणाम देख सकते थे।" इन बयानों को सुनते ही कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस मुद्दे को चुनौतियों भरा बताया। वे मानते हैं कि मतदाता विलोपन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सार्वजनिक जांच का अभाव चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करता है। थरूर ने कहा कि यह केवल एक राज्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश में मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन रखने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि चुनाव आयोग को ऐसी स्थिति में त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, जिससे भविष्य में подобных त्रुटियों से बचा जा सके। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने कहा कि बंगाल में हुई कई बहुलता भरी घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और उन्होंने थरूर की बातों को समर्थन दिया। वहीं, भाजपा ने इस बात को खारिज किया कि मतदाता विलोपन ने उसे फायदा पहुंचाया। भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग ने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया और कोई भी पक्षपात नहीं हुआ। निष्कर्षतः, श्रीनिधि थरूर की बातों ने इस बार मतदाता सूची में त्रुटियों और उनके संभावित परिणामों को एक बार फिर से सार्वजनिक मंच पर लाने का काम किया है। यह सवाल उठाता है कि क्या भारत में चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए हैं। अगर मतदाता विलोपन जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया गया तो लोकतंत्र की मूलभूत नींव को ही नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि संबंधित संस्थाएं इस दिशा में त्वरित सुधार करें, ताकि भविष्य के चुनावों में प्रत्येक नागरिक को अपना मताधिकार बिना किसी बाधा के प्रयोग कर सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 11 May 2026