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Breaking News: एमके स्टालिन ने वीसीके व बाएँ गठबंधन को धन्यवाद, कांग्रेस को किया धोखा का आरोप
🕒 1 hour ago

तमिलनाडु की राजनीति में इस हफ़्ते एक बड़ी हलचल देखी गई, जब द्रविड़ मुन्कड़न कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एमके स्टालिन ने वीसीके (विकास कांग्रेस) और बाएँ दलों को उनके गठबंधन को नीति के आधार पर बनाए रखने के लिये धन्यवाद दिया। स्टालिन ने खुलकर बताया कि इन पक्षों ने अपने सिद्धांतों के अनुसार एकजुटता बनी रखी है, जबकि कांग्रेस को "विश्वासघाती" कहा। इस बयान में उन्होंने यह भी कहा कि अब वे लंका सभा (लोकसभा) में कांग्रेस के साथ बैठना नहीं चाहते। स्टालिन का यह बयान कई समाचार एजेंसियों द्वारा व्यापक रूप से प्रकाशित किया गया। उन्होंने कहा कि विक्रमविलास क़वाणी (वीसीके) और अन्य बाएँ दलों ने द्रविड़ विचारधारा और सामाजिक न्याय की नीति पर ठोस समर्थन दिया है, जिससे गठबंधन की नींव को मजबूत किया गया। इस प्रकार के गठबंधन को "नीति आधारित" कहा गया, जिसका मतलब है कि यह केवल सत्ता जीतने के लिये नहीं, बल्कि साझा सामाजिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिये है। इस बीच, कांग्रेस को कई बार गठबंधन के रणनीतिक हितों में नहीं समझा गया, जिसके कारण स्टालिन ने इसे "धोखा" कहा। लीडरशिप के बीच मतभेदों ने भी इस शख्सियत को स्पष्ट किया। लंका सभा में अब कांग्रेस के साथ बैठने की इच्छा नहीं रखने के पीछे प्रमुख कारण में कांग्रेस की "परिणामसंकट" और पार्टी के भीतर असंतुलन को बताया गया। डीएमके ने कहा कि कांग्रेस ने कई बार धोखा दिया है, जिससे उनका गठबंधन का विश्वास टूट गया। इस बीच, डीक्यू पब्लिक चैनल ने रिपोर्ट किया कि इस निर्णय के बाद डीक्यू ने लंका सभा में अपनी सीटों को भी सुरक्षित रखने की रणनीति अपनाई है, जिससे भविष्य में संभावित गठबंधन में और जटिलताएँ सामने आ सकती हैं। वर्तमान में तमिलनाडु की राजनीति एक नई दिशा में प्रवेश कर रही है। डीक्यू के साथ गठबंधन को पुनः स्थापित करने के लिये विभिन्न विचारधाराओं की बातचीत जारी है, जबकि कांग्रेस को अपनी रणनीति पुनर्परिचालन करनी होगी। स्टालिन ने यह भी स्पष्ट किया कि डीक्यू के साथ उनका सहयोग सामाजिक न्याय और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा रोजगार के क्षेत्रों में सुधार के लिये रहेगा। यदि ये नीतिगत लक्ष्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ते रहे तो तमिलनाडु के लोगों को इस गठबंधन से बड़े लाभ की उम्मीद की जा सकती है। अंत में यह कहा जा सकता है कि इस राजनीतिक मोड़ ने तमिलनाडु में भविष्य की दिशा तय कर दी है। डीक्यू के साथ गठबंधन को नीति के आधार पर लाया गया है, जबकि कांग्रेस को अब अलग रास्ता अपनाना पड़ेगा। यह बदलाव न केवल राज्य की राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गठबंधन की शक्ति संतुलन में नए प्रश्न खड़े कर सकता है। इस विकास के साथ ही सभी राजनीतिक दलों को अब अपने-अपने सिद्धांतों और जनता की अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करना पड़ेगा, ताकि लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 09 May 2026