10 मई को तमिलनाडु के इतिहास में एक नया मोड़ दर्ज होगा, जब टीवीके के प्रमुख विजय ने मुख्य मंत्री के शपथ समारोह में भाग लेकर सत्ता की कुर्सी संभालने की तैयारी पूरी कर ली है। इस दिन को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल देखी जा रही है, क्योंकि विजय को कई दलों के गठबंधन और कई कठिन निर्णयों के बाद ही इस मंच पर बुलाया गया। उनके इस एंट्री को देखते हुए कई लोग आशावादी हैं, जबकि कुछ विरोधियों ने अभी भी सवाल उठाए हैं। विजय की इस सफलता के पीछे कई राजनैतिक चालबाज़ियां छिपी हुई हैं। पहले पांच दिनों में उन्हें 107 और 120 के बीच के एक धुंधले समीकरण को सुलझाना पड़ा, जहाँ विरोधी दलों ने कई बार उन्हें मुख्य मंत्री पद से दूर रखने की कोशिश की। अंततः 28 विधायक, जिनमें EPS के समर्थक भी शामिल थे, ने उनके पक्ष में अपना समर्थन दिया, जिससे उनका गठबंधन मजबूत हुआ। एआईएडिएमके के कुछ वरिष्ठ नेता, जो पहले विषमता दिखा रहे थे, अब उनके साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे, जिससे इस गठबंधन की स्थिरता पर सवाल उठाए जा रहे थे। विजय के शपथ ग्रहण की तैयारी के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को एक साथ लाना पड़ा। दो दलों के बीच छोटे-छोटे समन्वय, पाँच दिनों में चार-चार बैठकें, और एक पैदल यात्रा के दौरान उड़ान रद्द होने जैसी घटनाओं ने इस प्रक्रिया को और भी रोमांचक बना दिया। वीके के समर्थन में केवल दो विधायक वाले वीसीके ने भी तीन दिनों तक विजय को समर्थन दिया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि इस सरकार को स्थिर रखने के लिये हर छोटी-छोटी ताकत को जोड़ना आवश्यक था। अब जब विजय का शपथ ग्रहण निश्चित हो गया है, तो तमिलनाडु की जनता और राजनैतिक विश्लेषक इस बात पर गौर कर रहे हैं कि यह नई सरकार किन मुद्दों को प्राथमिकता देगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में सुधार, साथ ही रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान देना अपेक्षित है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस गठबंधन की स्थिरता और नीति निर्धारण की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जिससे आने वाले महीनों में यह देखना होगा कि विजय अपनी सरकार को किस हद तक सफल बना पाते हैं। अंत में कहा जा सकता है कि विजय का शपथ ग्रहण तमिलनाडु की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत है। विभिन्न दलों के सहयोग से बनी इस गठबंधन ने कई कठिनाइयों को पार किया है, और अब यह देखना बाकी है कि यह सरकार अपने वादों को कार्यान्वित कर पाती है या नहीं। जनता के आशा-आशंकाओं के बीच, विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु की भविष्य की राह तय होगी, और यह आशा की जाती है कि इस नई सरकार से राज्य के विकास में नई ऊर्जा और सकारात्मक बदलाव आएँगे।