केरल में कांग्रेस पार्टी के भीतर आगामी मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर तनाव का माहौल धधक रहा है। वर्तमान में तीन प्रमुख नेताओं—पी.एस. प्रीमो, ए.ए. डिवालैकुमार, और वी.एस. सतीशन—के समर्थन में अलग-अलग समूह दृढ़तापूर्वक अपना पक्ष बढ़ा रहे हैं। उनके पोस्टर, बैनर और प्रचार सामग्री सड़कों, बिद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर लटके हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अब केवल राजनैतिक चर्चा नहीं, बल्कि दृश्य संघर्ष भी बढ़ रहा है। इस बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नेता श्यामा ठाकुर, कर्नाटक के पूर्व केंद्रीय मंत्री वी.एस. थरूर, और महाराष्ट्र के अनुभवी राजनेता कपिल खड़गे समेत कई वरिष्ठ सदस्य दिल्ली में एकत्रित हुए हैं, जहाँ निर्णय के अंतिम चरण पर चर्चा होने की संभावना है। पिछले कुछ हफ्तों में, तीननो दावेदारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में समर्थन जुटाने की तेज़ी दिखाई है। प्रीमो, जो पहले गृह मामलों के मंत्री रहे हैं, ने अपने पुराने आधार को पुनर्जीवित करने के लिए कई छोटे-छोटे गांवों में व्यक्तिगत रूप से दौरा किया है और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ मिलकर व्यापक पोस्टर अभियान चलाया है। डिवालैकुमार, जो आर्थिक विकास की योजनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं, ने अपनी उपलब्धियों को उजागर करने के लिए बड़े बैनर और डिजिटल विज्ञापन पर ध्यान दिया है, जिससे वह शहरी पाठकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। सतीशन, जो हाल ही में पार्टी के कार्यकारियों के बीच 'एकल वोट' का समर्थन पा रहे हैं, ने एकजुटता का नारा देकर दल के भीतर अपने शक्ति को बढ़ाया है, जबकि उनके समर्थकों ने 'केवल वी.डी.' का स्लोगन भी जोर-शोर से चलाया। केरल के कांग्रेस कार्यकारियों के बीच इस चयन प्रक्रिया को लेकर मतभेद साफ़ दिख रहे हैं। कुछ बड़े नेताओं का मानना है कि अनुभवी और खुले विचारों वाले प्रीमो को मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त माना जाना चाहिए, जबकि युवा और सक्रिय डिवालैकुमार को प्रगतिशील नीतियों के कारण अगला विधायक बनाया जा सकता है। दूसरी तरफ, सतीशन को उन क्षेत्रों में समर्थन मिल रहा है जहाँ कांग्रेस ने पिछले चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया था, और उनका दावा है कि उनका नेतृत्व पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की कुंजी हो सकता है। इस बहस में, केरल के कई सांसदों और राष्ट्रीय नेताओं ने भी अपनी राय रखी, जिससे निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो गई है। दिल्ली में कांग्रेस के उच्च स्तर के नेताओं का मिलन इस बात का संकेत देता है कि अंतिम निर्णय जल्द ही लिया जाएगा। थरूर और खड़गे दोनों ने कहा है कि पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो पार्टी को फिर से केरल में मजबूत बना सके और चुनावी गठबंधन में संतुलन बनाए रखे। कई अनुमान लगाते हैं कि अगले 24 घंटे में ही उच्च कमान इस मुद्दे पर एकमत हो जाएगी, जिससे केरल में अगले मुख्यमंत्री का चयन आधिकारिक रूप से घोषित किया जाएगा। यह निर्णय न केवल पार्टी के भीतर बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा को भी निर्धारित करेगा, क्योंकि अगले चुनावों में कांग्रेस को फिर से सत्ता में लौटने की आशा है। अंत में कहा जा सकता है कि केरल में कांग्रेस का यह आंतरिक संघर्ष न केवल पार्टी के भविष्य को निर्धारित करेगा, बल्कि राज्य के विकास योजनाओं और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों को भी नया रूप देगा। तीननो दावेदार अपने-अपने पक्ष में सबसे मजबूत समर्थन जुटाने के लिए पोस्टर और मॉर्चा जैसे साधनों का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन अंततः निर्णय दिल्ली के उच्च कमांड के हाथ में होगा। चाहे वह प्रीमो, डिवालैकुमार या सतीशन हों, उनका चयन केरल की राजनीति में नई ऊर्जा और दिशा लाने की संभावना रखता है, और केरल के नागरिकों को एक ऐसी सरकार की उम्मीद होगी जो विकास, सामाजिक न्याय और आर्थिक प्रगति को संतुलित रूप से आगे बढ़ाए।