📰 Kotputli News
Breaking News: प्लेडिंग में भावनाओं का तूफ़ान: पीएम मोदी ने 98-वर्षीय मक़नलाल सरकार के पैर छुए, बंगाल में नई अभिषेक रिवाज ने गहराई से छुआ दिल
🕒 1 hour ago

राष्ट्रपति के आधिकारिक घर में आयोजित पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों की शपथ ग्रहण समारोह में एक भावनात्मक क्षण ने सबको चकित कर दिया। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 98 वर्ष की आयु के बुजुर्ग भाजपा कार्यकर्ता मक़नलाल सरकार के पैर छुए। यह साधारण क्रम से हटकर एक दिल छू लेने वाला क्षण था, जिसने भारतीय राजनीति के भीतर श्रद्धा, सम्मान और जमीनी संपर्क की गहरी भावना को उजागर किया। मक़नलाल सरकार, जिन्हें कई लोगों ने ‘भक्तियों के प्रतीक’ कहा, वह 1952 से ही भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। आज वे केवल एक दायरे में कार्यकर्ता नहीं, बल्कि पार्टी के इतिहास के जीवित साक्षी बन गए हैं। शपथ ग्रहण के दौरान जब शासकों का अभिषेक हो रहा था, मोदी ने उनके चरणों को स्पर्श कर एक शुद्ध आशीर्वाद लिया और उन्हें अपने हाथों से गले भी लगाया। इस तरह की परम्परा आम तौर पर नहीं देखी जाती, परंतु यह क्षण भारत में पुराने स्वभाव और युवा शक्ति के बीच के पुल को दर्शाता है। बंगाल की राजनीतिक ध्रुवता के बीच इस अनौपचारिक इशारे ने कई सवाल खड़े किए। एक ओर, यह कार्यकर्ता वर्ग के प्रति सम्मान और उनके अथक संघर्ष की सराहना के रूप में देखा गया। दूसरी ओर, विपक्षी दल ने इसे राजनीतिक दिखावा कहा, यह तर्क देते हुए कि इस तरह की भावनात्मक छवि से जनता के दिल में विशेष प्रभाव पड़ता है। फिर भी, इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि भाजपा के सर्वोच्च नेता अपने आधार को केवल युवा और शहरी मतभेदों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि वे बुजुर्ग और ग्रामीण आधार के साथ भी गहरा संबंध बनाते हैं। समारोह के बाद कई मीडिया संस्थानों ने इस पर प्रकाश डाला। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे ‘आश्चर्यजनक मोड़’ कहा, जबकि एनडीटीवी ने मक़नलाल सरकार की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कई प्रमुख राजनैतिक बदलाव देखे हैं। इन्डिया टुडे और द हिन्दू ने इस इशारे को पार्टी के मूल्यों के साथ जोड़ते हुए कहा कि यह ‘सेवा, समर्पण और सम्मान’ का प्रतिक है। इस प्रकार का भावनात्मक सौजन्य भारतीय राजनीति में नई गति लाने की संभावना को दर्शाता है, जहाँ अनुभवी और युवा दोनों ही साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ कर सकते हैं। अंततः, पीएम मोदी द्वारा मक़नलाल सरकार के पैर छूने का यह क्षण इतिहास की नई पन्नी लिखता है। यह न केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में बौद्धिक और सांस्कृतिक विविधता के बीच सहयोग को भी रेखांकित करता है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को देखना संभव है, जहाँ राजनीति केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि मानवीय भावनाओं और सामाजिक बंधनों के साथ भी जुड़ी होगी। इस घटना से स्पष्ट है कि चाहे उम्र कितनी भी हो, सम्मान और आशीर्वाद की भावना हमेशा सर्वोपरि रहेगी।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 09 May 2026