तमिलनाडु में बहुपक्षीय गठबंधन की दुविधा आज फिर एक नई मोड़ ले रही है। राज्य के प्रमुख दलों के बीच सत्ता का खेल बुज़ुर्गों, गठजोड़ियों और व्यक्तिगत आकांक्षाओं से परिपूर्ण है। आज तक के लैंडस्केप को देखते हुए, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव एलायंस (डीएमके) का प्रमुख नेता एम.के. स्टालिन अपने दल को साफ़ संकेत दे चुका है: "पहले समर्थन प्राप्त करो, फिर राज्यपाल के पास जाओ"। इस बयान से स्पष्ट है कि डाक्टर विजय, जो मतदान के बाद सरकार बनाना चाहता है, आज शपथ समारोह में भाग नहीं ले पाएंगे। इस बीच, वैलायार कन्नन कम्युनिस्ट (वीसीके) का प्रतिनिधि जल्द ही टिवीके (टिरुंजन कम्युनिस्ट) को समर्थन देने की घोषणा करने वाला है, जिससे विजय के लिए संभावित सहयोगी आधार और कठोर हो गया है। विजय के पक्ष में गठबंधन बनाने के प्रयास अब तक 5+2+2+2‑2 की जटिल गणना में फँसे हुए हैं, जैसा कि हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया। कांग्रेस, एआईऐडियू, और छोटे दलों के समर्थन पर निर्भरता को देखते हुए, विजय को अब भी न्यूनतम दो‑तीन सेनाओं का समर्थन आवश्यक है। लेकिन वीसीके का टिवीके को समर्थन देने का संकेत, और डीएमके की दृढ़ स्थिति, विजय की गणनाओं को बिगड़ाते हुए नई अनिश्चितता पैदा कर रहा है। इस जटिल समीकरण में, राज्यपाल द्वारा शपथ ग्रहण की प्रक्रिया भी एक निर्णायक कारक बनकर उभरी है, क्योंकि बिना स्पष्ट बहुमत के किसी भी गठबंधन को वैध माना नहीं जा सकता। ड्राइंग रूम के बाहर, विपक्षी दलों ने भी इस क्षण को भांप लिया है। एनडीटीवी के अनुसार, एम.के. स्टालिन ने सरकार बनाते समय विजय को सीधे चुनौती दी है और कहा है कि "पहले समर्थन सुनिश्चित करो, फिर राज्यपाल के सामने पेश हो"। यह टिपण्णी न केवल विजय के लिए दबाव बढ़ाती है, बल्कि डीएमके के गठबंधन को भी मज़बूत करती है, जो अभी तक कोई आधिकारिक समर्थन नहीं दिया है। इसी बीच, न्यूज ऑन एआर ने बताया कि दुबारा सरकार बनते समय सामने आने वाली अनिश्चितताएँ और अनुक्रमिक बातचीतें इस प्रक्रिया को और जटिल बना रही हैं। निष्कर्षतः, तमिलनाडु में वर्तमान राजनीतिक माहौल एक सख़्त पहेली जैसा लग रहा है। विजय की सरकार बनाना आज के समय में अत्यधिक असंभव प्रतीत हो रहा है, जबकि वीसीके का टिवीके को समर्थन देने का इरादा इस क्षेत्र में नई समीकरण पेश कर रहा है। डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव एलायंस की सतर्क स्थिति और स्टालिन की स्पष्ट चेतावनी विजय के लिये बड़े अवरोध बनते दिख रहे हैं। अब यह देखना बचेगा कि अगले कुछ घंटों में कौन-से दल अपने समर्थन की घोषणा करेंगे और क्या राज्यपाल अंततः किसी गठबंधन को शपथ ग्रहण के लिए मान्यता देंगे।