होरमज़ जलडमरूमध्य में फिर से ज्वालामुखी उभरी। अमेरिकी बलों ने ईरान पर नई हवाई और समुद्री हमलों की शुरुआत की, जबकि इसी दौरान एक चीनी टैंकर को ईरानी ड्रोन ने मार गिराया, जिससे बीजिंग ने "गहन चिंता" जताई। यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता को और तेज करती दिखाई देती है। दिल्ली में कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार के संघर्ष से न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मार्ग भी खतरे में पड़ सकते हैं। अमेरिकी सेना ने बताया कि उन्होंने देर रात गोलाकार शिकार विमान और नौसैनिक जहाजों के सहयोग से ईरान के दो प्रमुख लक्षणीय स्थल पर सटीक बमबारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान द्वारा हवाई सीमा में बाधा डालने वाली रडार प्रणालियों को निष्क्रिय करना था। इसी बीच, ईरानी मिलिटेंट समूहों ने एक चीनी तेल टैंकर को लक्षित किया, जिसे ईरान के तट के निकट समुद्र में टकराव के दौरान बमबारी कर दिया गया। टैंकर को गंभीर क्षति पहुंची, लेकिन जहाज पर मौजूद सभी कॉबी और चालक दल को बचा लिया गया। इस हमले के तुरंत बाद बीजिंग ने एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि "हमें इस प्रकार के बंधकात्मक कार्यों से गहरी चिंता है और हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि शांति और संवाद के रास्ते अपनाए जाएँ"। इसी दौरान, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी हलचल भरे मंच पर कहा कि "होरमज़ में हुए इस विनाशकारी आदान-प्रदान के बाद भी, अब तक यूएस-ईरान के बीच स्थापित बंदूक पाबंदी बनी हुई है"। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त किया कि अमेरिका कोई भी आपत्तिजनक कदम नहीं उठाएगा और वार्ताओं के माध्यम से ही समाधान खोजा जायेगा। दूसरी ओर, ईरानी सरकार ने इस हमले को "अवैध अमेरिकी वर्चस्व" कहा और कहा कि वह अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाते रहेगी। वर्तमान में, मध्य पूर्व में जारी तनाव ने वैश्विक तेल की कीमतों को भी हिला दिया है। हार्बर में तेल के कंटेनर की कीमतें पिछले कुछ घंटों में 4 प्रतिशत तक बढ़ गईं, और कई बड़ी कंपनियों ने अपने शिपमेंट योजनाओं में बदलाव की घोषणा की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार की घटनाएँ बार-बार दोहराई गईं तो तेल आपूर्ति श्रृंखला में बड़े व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। निष्कर्ष स्वरूप, होर्मज़ में इस बार हुई अमेरिकी-ईरानी टकराव और चीनी टैंकर पर हुए हमले ने इस जलडमरूमध्य को फिर से विश्व के सबसे खतरनाक शिपिंग मार्गों में से एक बना दिया है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कूटनीतिक प्रयासों को तेज करना चाहिए, ताकि इस तनाव को आगे बढ़ने से रोका जा सके और समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा व्यापार एवं आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखा जा सके।