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Breaking News: तेलंगाना में 107 विधायक बनाम 118 की ज़रूरत: संविधान क्या कहता है?
🕒 1 hour ago

तमिलनाडु में वर्तमान राजनीतिक उलझन ने देशभर में संविधान संबंधी बहस को फिर से ज्वलंत कर दिया है। मुख्यमंत्री विजय सिंह ने अपनी सरकार बनाने के लिए 107 विधायक जुटा लिए हैं, जबकि राज्यपाल ने 118 सदस्यों की बैंडविथ मांगी है, जिससे यह सवाल उठता है कि संविधान के अनुसार सरकार गठन में न्यूनतम कितने सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। इस मुद्दे पर विभिन्न समाचार स्रोतों ने गहराई से विश्लेषण किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस प्रकार की स्थिति में राष्ट्रपति शासन की संभावनाएं भी बन सकती हैं। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, किसी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए निरंतर बहुमत (बिलकुल 50 प्रतिशत से अधिक) का होना अनिवार्य है। तमिलनाडु की विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं, इसलिए न्यूनतम 118 विधानसभा सदस्य ही सरकार को वैध रूप से तय करने का अधिकार देते हैं। हालांकि, वर्तमान में विजय की सरकार ने 107 समर्थन प्राप्त किया है, जो कि 118 की सीमा से कम है। इस कमी के कारण राज्यपाल ने सरकार के गठन के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या की मांग की, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि संविधानिक सिद्धांतों के आधार पर केवल 107 समर्थन से सरकार को स्थायी नहीं माना जा सकता। कई कानून विशेषज्ञों ने कहा है कि अगर किसी भी समय सरकार के पास निरंतर बहुमत नहीं रहता, तो राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है। तमिलनाडु में यह खतरा तब और बढ़ जाता है जब विपक्षी दल और स्वतंत्र विधायक मिलकर सरकार को गिराने की कोशिश करते हैं। इस पार्श्व प्रभाव से यह भी सिद्ध होता है कि केवल बहुमत के आँकड़े ही नहीं, बल्कि उन बहुमत को स्थापित करने की प्रक्रियाएं भी महवपूर्ण हैं। कई राजनैतिक विश्लेषकों ने राज्यपाल के इस निर्णय को संविधान की सीमा में मानते हुए, इसे एक कदम समझा है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक है। आगे चलकर तमिलनाडु की राजनीति इस गठबंधन खेल को कैसे सुलझाती है, यह देश के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगा। यदि विजय सरकार ने अपनी बहुमत की पुष्टि के लिये फ़्लोर टेस्ट कराई, तो वह अस्थायी रूप से सत्ता में रह सकेगी, परंतु अगर यह टेस्ट असफल रहा तो राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है। यह स्थिति तमिलनाडु के नागरिकों के लिए भी गहरी चिंता का कारण बन रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके दैनिक जीवन और शासन के स्थायित्व को प्रभावित करती है। निष्कर्षतः, संविधान स्पष्ट रूप से 118 वोटों की आवश्यकता को रेखांकित करता है, और राज्यपाल ने इस बात को निरंतर बहुमत की शर्त के रूप में लागू किया है। वर्तमान राजनीतिक जाल में विजय की 107 विधायक समर्थन पर्याप्त नहीं है, और इस कारण से राज्यपाल ने अतिरिक्त 11 सदस्यीय मांग की है। अगर यह मांग पूरी नहीं होती, तो राष्ट्रपति शासन का प्रावधान लागू होगा, जिससे तमिलनाडु में नई बुनियादी बदलाव की संभावना खुल जाएगी। यह घटना संविधान के महत्व और लोकतंत्र की बुनियादी डोर को फिर से सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 07 May 2026