तमिलनाडु की राजनीति में इस सप्ताह एक तीखा टकराव देखने को मिला, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने द्रविड़ मुन्नुर कडगम पार्टी (डीएमके) पर अपने सहयोगी तामिलवड़े के वी.के. सुजला (टीवीके) को ‘बैकस्टैब’ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि समान विचारधारा वाले दलों के साथ सरकार बनाना कोई अपराधिक कृत्य नहीं है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपप्रधानमंत्री और तमिलनाडु में मुख्य कार्यकारी अधिकारी, टी. आर. बाळु ने कहा कि कांग्रेस ने पूर्व में भी कई बार समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन किया है और यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों दल मिलकर राज्य में स्थिर सरकार बनाते हैं तो यह किसी भी पार्टी की राष्ट्रीय नीति या वैचारिक सिद्धान्तों के विरुद्ध नहीं है। डिकमी, जो कि डीएमके के साथ 11 साल से मजबूत गठबंधन में था, ने हाल ही में कांग्रेस को अपने गठबंधन से बाहर निकालते हुए कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व अब तमिलनाडु में केवल अपने ही हितों को देख रहा है। इस पर डीएमके के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने तेज आगाह किया कि कांग्रेस का यह कदम तमिलनाडु के जनसमर्थन को ‘धोखा’ देगा और उसे ‘बैकस्टैब’ कहा। डीएमके ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा अब तक अपनाए गए ‘बीजेपी शॉर्टकट’ से राज्य की राजनीति को गहरी क्षति पहुँच रही है। कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल तमिलनाडु में स्थिर, विकासशील और शांति पूर्ण सरकार बनाना है, चाहे वह किसी भी विचारधारा के साथ मिल कर हो। पार्टी ने कहा कि अगर दो या अधिक समान विचारधारा वाले दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तो यह ‘विरोधी’ या ‘बैकस्टैब’ नहीं कहलाता। उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि कांग्रेस ने पहले भी कई बार विभिन्न दलों के साथ मिलकर गठबंधन किया है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर भी कई उदाहरण हैं। इस बात को उजागर करते हुए बाळु ने कहा कि अगर किसी पार्टी को केवल राष्ट्रीय स्तर पर ‘विचारधारा’ के कारण गठबंधन से बाहर किया जाए, तो वह लोकतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है। इस बीच, डीएमके ने कांग्रेस के इस बयान को ‘धोखा’ मानते हुए कहा कि राज्य में जनमत का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रतिनिधियों को इस प्रकार की ‘बैकस्टैब’ धारा के साथ ट्रीट नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कांग्रेस के सदस्य बिना प्रामाणिकता के इस तरह के गठबंधन करते हैं, तो यह तमिलनाडु के मतदाता के भरोसे को तोड़ देगा। सभी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से तमिलनाडु में अगले चुनाव के पहले राजनीतिक परिदृश्य और अधिक जटिल हो सकता है, क्योंकि दो प्रमुख विरोधी दल अब एक-दूसरे के खिलाफ़ नहीं बल्कि साथ काम करने की कोशिश कर रहे हैं। निष्कर्षतः, तमिलनाडु की राजनीति में इस नई गठबंधन की दिशा पर अभी कई सवाल बचे हैं। कांग्रेस ने कहा कि समान विचारधारा वाले पार्टियों के साथ सरकार बनाना भारतीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांत के अनुरूप है, जबकि डीएमके ने इसे ‘बैकस्टैब’ और ‘धोखा’ कहा। आगामी दिनों में दोनों पक्षों के बीच वार्ता का परिणाम क्या होगा, यह देखना बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि जनमत और विकास के सवाल इस राजनीतिक बवाल में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।