हिमंत बिसवा सरमा, असम के प्रमुख मंत्री और बीजेपी के प्रमुख चेहरा, ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चर्चा खड़ी कर दी। विधानसभा में एक सत्र के दौरान, गौऱव गोगोई, कांग्रेस के सांसद और असम के प्रमुख विपक्षी नेता, को ‘सबक सिखाने’ की कसमें खाते हुए सरमा ने कहा था कि वह गोगोई को जल्द ही भुगतान करके उसकी बात को पूरा करेंगे। यह बयान तब विवादास्पद बन गया जब गोगोई ने कहा कि सरमा ने अपने वादे को पूरी तरह नहीं किया और उनका सम्मान घट गया। लेकिन कुछ हफ्ते बाद सरमा ने यह दावा किया कि उन्होंने गोगोई को केवल बात ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी ‘ब्याज सहित’ चुकाया है, जिससे इस मुद्दे में नई रौशनी पड़ी। सरमा का यह बयान कई समाचार स्रोतों में प्रकाशित हुआ, जहाँ उन्होंने बताया कि गोगोई ने अपने कुछ आर्थिक दायित्वों को पूरा नहीं किया था और इस वजह से उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर हस्तक्षेप कर एक ‘ब्याज सहित’ वार्ता की पेशकश की। इस प्रक्रिया में सरमा ने गोगोई को अपनी ओर से दिए गए ऋण पर अतिरिक्त ब्याज का भुगतान कर दिया, जिससे गोगोई को अपने कर्ज की सबसे बड़ी रक़म से भी अधिक मिल गया। इस प्रकार, सरमा ने अपने प्रतिद्वंद्वी को केवल पैसे ही नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी दिया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस घटना ने असम के राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। कांग्रेस के कई नेता इस बात को ‘राजनीतिक दिखावा’ कर रहे हैं और इसे सरमा की शिष्टाचार पर सवाल उठाने का अवसर मान रहे हैं। वहीं, बीजेपी के पक्षधर इस कदम की सराहना कर रहे हैं, कहते हुए कि यह राजनीतिक नैतिकता का एक नया उदाहरण स्थापित करता है, जहाँ विवाद के समाधान के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। असम के चुनावी माहौल में यह बात और भी ज़्यादा महत्व रखती है, क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहे हैं और दोनों पार्टियों के बीच की यह तीव्रता मतदाताओं के मनोदशा को प्रभावित कर सकती है। निष्कर्षतः, हिमंत बिसवा सरमा का ‘ब्याज सहित भुगतान’ का कदम असम की राजनीति में एक नई दिशा का संकेत देता है। चाहे यह कदम हितकारी हो या अनावश्यक, यह स्पष्ट है कि इस प्रकार की सार्वजनिक प्रतिज्ञाएँ और उनके बाद के कार्य पार्टी की छवि को आकार देने में अहम भूमिका निभाते हैं। गौऱव गोगोई की प्रतिक्रिया और भविष्य में इनके बीच की राजनीति कैसे विकसित होगी, यह देखना बांकि है, पर यह तथ्य निश्चित है कि इस प्रकार के राजनैतिक मंच पर किए गए बयान और उनके परिणाम जनता के बीच गहरी छाप छोड़ते हैं।