नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संरचनात्मक शक्ति में ऐतिहासिक बदलाव की निशानी के रूप में केंद्र सरकार ने आज अपने मंत्रिस्तरीय बैठक में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या वर्तमान 34 से बढ़ाकर 38 करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया। यह निर्णय भारतीय लोकतंत्र के निकाय में न्यायिक प्रावधानों को सुदृढ़ करने और लंबित मुकदमों के तेजी से निपटान के उद्देश्य से लिया गया है। अध्यक्ष नरेंद्र मोदी ने इस प्रस्ताव को पारदर्शी एवं त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के समर्थन में बताया, जबकि मुख्य न्यायाधीश ने इसके कार्यान्वयन से जुड़े कई सकारात्मक पहलुओं की ओर इशारा किया। सुप्रीम कोर्ट के बीते कई दशकों में न्यायालय में कलीसिया (कैरी) की अत्यधिक संख्या के कारण कोर्ट की कार्यवाही में देरी और केस बॅकलॉग में वृद्धि देखी गई थी। मौजूदा 34 न्यायाधीशों के साथ ही कई महत्वपूर्ण मामलों में न्यायिक निर्णयों की प्रतीक्षा में महीनों से लेकर वर्षों तक का समय लग रहा था। इस दिशा में नई मंजूरी से न्यायालय के कार्यभार को संतुलित करने, मुकदमों के निपटान में गति लाने और न्याय की पहुँच को व्यापक बनाने की उम्मीद है। संवैधानिक परिवर्तन के तहत सर्वोच्च कोर्ट के संवैधानिक एवं विधायी अधिकारों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया, केवल न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की गई है, जिससे मौजूदा न्यायिक ढांचा अधिक प्रभावी बन सकेगा। मुख्य न्यायाधीश ने इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर कहा कि 38 न्यायाधीशों की शक्ति से अदालत के विभिन्न पैनलों में अधिक विविधता लाना संभव होगा और न्यायाधीशों के कार्यभार का समान रूप से वितरण हो सकेगा। इससे विशेष रूप से आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मामलों में विशेषज्ञता वाले पैनलों की स्थापना को तेज़ी मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह कदम न्यायालय के प्रबंधन को अधिक लचीला बनाकर न्यायालयीन निर्णयों की समयबद्धता सुनिश्चित करेगा। पर्यवेक्षक और विधायी विशेषज्ञों ने भी इस कदम का स्वागत किया, जबकि कुछ ने कहा कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ न्यायालयीन प्रक्रिया में सुधार, डिजिटलकरण और साक्ष्य प्रबंधन के आधुनिक तरीकों को अपनाना भी अनिवार्य है। ऐसा करने से न केवल केस बॅकलॉग घटेगा, बल्कि न्याय की समानता और पहुंच भी सुनिश्चित होगी। समग्र रूप में, केंद्रीय कैबिनेट की इस मंजूरी से सुप्रीम कोर्ट की कार्यशैली में नया अध्याय शुरू होगा। भविष्य में यह आशा की जा रही है कि 38 न्यायाधीशों की शक्ति के साथ न्यायालय अधिक तेज़, पारदर्शी और जनहितैषी निर्णय प्रदान करेगा, जिससे भारतीय न्याय प्रणाली को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।