असम में आज सुबह 8 बजे से वोटों की गिनती शुरू होने के साथ ही पूरे राज्य में तनाव का माहौल दोबला हुआ है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (बीजेडी) ने तीसरे लगातार कार्यकाल की ओर बढ़ते हुए अपने उम्मीदवारों को कई जिलों में प्रमुख जीत का भरोसा जताया है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व में गठित विपक्षी गठबंधन ने सत्ता पुनः प्राप्त करने की आशा जगी है। राज्य के लगभग चालीस चुनाव केंद्रों में गिनती जारी है, और परिणाम जल्द ही स्पष्ट होने वाले हैं। गिनती की प्रक्रिया शुरू होते ही कई समाचार एजेंसियों ने बताया कि बीजेडी ने पहले ही दस सीटों पर अपने आप को प्रमुख रूप से स्थापित किया है, जबकि कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने छह सीटों पर पकड़ बनाई है। हिमंत बिस्वा सरमा, जो बीजेडी के प्रमुख उम्मीदवार हैं और पिछले दो चुनावों में दो बार विजयी रहे हैं, इस बार छठी बार सत्ता में आने की चाह रखता है। उनका कहना है कि उन्होंने विकास के कार्यों और बुनियादी ढाँचे के सुधारों को प्राथमिकता दी है, जिससे उन्होंने ग्रामीण और शहरी मतदाताओं का भरोसा जीता है। दूसरी ओर, कांग्रेस-आरजेडी गठबंधन ने इस बार बांग्लादेश की सीमा के निकट के क्षेत्रों में अपनी लोकप्रियता को बढ़ाने की कोशिश की है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरियों के सृजन को मुख्य मुद्दा बनाया है, और कई अनुभवी नेताओं को पुनः प्रत्याशित किया है। विपक्षी दलों के अनुसार, बीजेडी की नीतियों में पारदर्शिता की कमी और संवैधानिक मुद्दों पर ध्येयहीनता ने उन्हें कमजोर कर दिया है। वर्तमान में गिनती के प्रारम्भिक आँकड़े दर्शाते हैं कि कई किनारे के क्षेत्र में परिणाम अभी भी बदलावशील हो सकते हैं। अपटुडेट रहने के लिए चुनाव निरीक्षकों ने कहा है कि गिनती में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, सुरक्षा बलों की गिनती स्थलों पर मौजूदगी को लेकर कोई शिकायत नहीं दर्ज हुई है, जिससे प्रक्रिया सुगमता से चल रही है। अंत में यह कहा जा सकता है कि असम के इस चुनाव में परिणाम न केवल राज्य की राजनीति को नया स्वरूप देंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े बदलावों की चेतावनी देंगे। यदि बीजेडी ने अपना तीसरा कार्यकाल हासिल किया, तो वह देश के कई प्रमुख राज्यों में लगातार सत्ता बनाए रखने वाला पहला दल बन जाएगा। वहीं, यदि कांग्रेस गठबंधन ने सत्ता हासिल की, तो वह विपक्षी दल के लिए बड़ी जीत होगी और आगामी राष्ट्रीय चुनावों में उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा। परिणामों का निर्णय जल्द ही स्पष्ट होगा, और असमी जनता को अपने भविष्य की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा।