दिल्ली के शहदरा इलाके में स्थित विवेक विहार अपार्टमेंट में 9 मई को लगी मद्धिम आग ने एक रात में ही दस लोगों की जान ले ली और कई और परिवारों को बिखर दिया। यह दुखद घटना न केवल मानवीय त्रासदी बन के सामने आई, बल्कि इमारत की सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी को भी उजागर कर गई। घर में बसे रहने वाले लोगों ने बताया कि आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते पर लोहे की ग्रिल लगी हुई थी, जिस कारण कई फँसे हुए अपार्टमेंट से बाहर नहीं निकल पाए। इन ग्रिलों को इमारत मालिक ने सुरक्षा कारण से नहीं हटाया था, जबकि ऐसी ग्रिलें आपातकालीन निकास को अवरुद्ध करती हैं और जिंदा रहने वालों को घातक धुआँ और गर्मी में फँसा देती हैं। इसके साथ ही कई अपार्टमेंट दरवाजों पर लगे ‘स्मार्ट लॉक’ ने बचाव कर्मियों को भी द्वार खोलने में असमर्थ कर दिया। इन लॉक के निर्देशानुसार केवल अंदर के निवासी ही उन्हें खोल सकते थे, जबकि आग के शिकार लोग बाहर फँसे थे और उनके पास इस तकनीक का कोई विकल्प नहीं था। इसी के साथ, बालकनी और खिड़कियों पर लगे जाल (नेट) ने भी लोगों की बचाव को कठिन बना दिया। इन जालों को मकान मालिक ने चोरों को तंग करने के लिए लगाया था, परन्तु आग की स्थिति में इनका ही उपयोग कई परिवारों ने बचाव के साधन के रूप में करने की कोशिश की। लेकिन अत्यधिक गर्मी और तेज़ी से बढ़ती आग ने इन जालों को ध्वस्त कर दिया, जिससे कई लोग एक ही वंशावली में बच नहीं पाए। आग का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है, परन्तु स्थानीय अधिकारी और फायर ब्रिगेड ने बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों की लापरवाही, अपर्याप्त अग्निरोधी सामग्री, तथा आपातकालीन निकास के अभाव ने इस त्रासदी को जन्म दिया। फायर डिपार्टमेंट के अनुसार, इमारत में पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं थी, और फायर अलार्म सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर रहा था। इसलिए आग जल्दी नहीं बुझायी जा सकी और शीघ्र ही शिखर पर पहुँच गई। दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए परिवारों को सांत्वना दी और कहा कि पीड़ितों के परिवारों को पूर्ण मदत और राहत प्रदान की जाएगी। सरकार ने इमरजेंसी राहत निधि के माध्यम से प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता की घोषणा की और इमारतों की सुरक्षा जाँच को कड़ाई से लागू करने का आश्वासन दिया। इस घटना के बाद कई सुरक्षा विशेषज्ञों ने अपार्टमेंट और आवासीय भवनों में सुरक्षा मानकों की कठोर समीक्षा की मांग की है, जिससे भविष्य में ऐसी त्रासदी को रोका जा सके। संक्षेप में, विवेक विहार आग की यह भिड़ी हुई त्रासदी केवल एक भयानक ज्वालामुखी नहीं, बल्कि सुरक्षा उपायों की लापरवाही का भी परिणाम थी। लोहे की ग्रिल, स्मार्ट लॉक और जाल जैसे साधनों ने बचाव को बाधित किया, जबकि उचित आग सुरक्षा उपकरण और निकास की कमी ने स्थिति को और अधिक विकराल बना दिया। इस घटना से हमें यह सिखना चाहिए कि निर्माण और रखरखाव के दौरान लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल आर्थिक या सौंदर्य कारणों से जोखिम उठाए जाएँ।