पर्यावरण संरक्षण और शहरी हरियाली को बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने राजस्थान राज्य के सभी जिलों और शहरों में पेड़ों की जियो-टैगिंग और पेड़ों की विस्तृत गणना कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह निर्णायक न्यायिक हस्तक्षेप राजधानी जयपुर स्थित चौमू हाउस में हुई पेड़ों की कटाई की घटना और उसके बाद उपजे पर्यावरणीय सरोकारों के मद्देनजर सामने आया है।
इस प्रशासनिक और कानूनी पहल की पृष्ठभूमि में राज्य के विभिन्न शहरी केंद्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और रियल एस्टेट विस्तार के कारण घटते हरित आवरण पर लगातार बढ़ती चिंताएं शामिल हैं। पिछले कई दशकों से पर्यावरणविदों और नागरिक कार्यकर्ताओं द्वारा जयपुर जैसे ऐतिहासिक प्रशासनिक केंद्रों में परिपक्व शहरी पेड़ों के अनियंत्रित कटाव के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है, जो वायु गुणवत्ता बनाए रखने और जैव विविधता संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एनजीटी द्वारा जारी इस नए विनियामक ढांचे के तहत वनों और पेड़ों के कटान को लेकर सख्त निगरानी प्रक्रिया लागू की गई है। इसके अंतर्गत अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि यदि किसी भी प्रस्ताव में 25 से ज्यादा पेड़ों को काटने की योजना होगी, तो उस प्रस्ताव की विधिवत जांच एक विशेष समिति द्वारा की जाएगी। यह समिति इस बात की गहराई से समीक्षा करेगी कि पेड़ों को काटना वास्तव में अनिवार्य है या नहीं।
इस व्यापक आदेश पर विभिन्न हितधारकों की प्रतिक्रियाएं काफी सकारात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टियों से सामने आ रही हैं, जो पारिस्थितिक संरक्षण और आधुनिकीकरण की प्राथमिकताओं के बीच संतुलन को दर्शाती हैं। जहां एक ओर पर्यावरणविदों और नागरिक संगठनों ने इस ऐतिहासिक निर्देश का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर नगर निकायों और शहरी योजनाकारों के समक्ष व्यापक वानस्पतिक मानचित्रण और निगरानी तंत्र को लागू करने की बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी आ गई है।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ने वाले इस क्षेत्रीय प्रभाव के तहत स्थानीय प्रशासनिक निकाय अब व्यापक अनुपालन ऑडिट की तैयारियों में जुट गए हैं। प्रणालीगत जियो-टैगिंग के लागू होने से स्थानीय समुदायों और जिला अधिकारियों को प्रत्येक परिपक्व पेड़ का डिजिटल रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी, जिससे अनधिकृत कटाई पर रोक लगेगी और जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
विभिन्न नगर निगमों और वन विभाग के निदेशालयों की ओर से प्रशासनिक प्रतिक्रिया अब त्वरित अनुपालन योजना की ओर केंद्रित हो गई है। आधुनिक भौगोलिक सूचना प्रणाली और उपग्रह आधारित मानचित्रण तकनीकों का उपयोग करके एनजीटी के इस आदेश को अमलीजामा पहनाने की तैयारियां चल रही हैं। राज्य भर के जिला प्रशासन वर्तमान में सर्वेक्षण टीमों और वानस्पतिक विशेषज्ञों को जुटाकर ट्री-सेंसस के कार्य को गति दे रहे हैं।
आगामी समय की योजना और दृष्टिकोण को देखते हुए, यह उम्मीद की जा रही है कि इन न्यायिक निर्देशों के सफल क्रियान्वयन से आने वाले महीनों और वर्षों में राजस्थान की शहरी नियोजन प्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएगा। 25 से अधिक पेड़ों की कटाई के मामलों में समिति द्वारा जांच और अनिवार्य जियो-टैगिंग के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित करके, राज्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए सतत विकास और पारिस्थितिक संरक्षण का एक मजबूत संतुलन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।