शूटर मोना अग्रवाल की यह प्रेरणादायक कहानी संघर्ष, अटूट जुनून और अभूतपूर्व सफलता की एक अनूठी मिसाल पेश करती है। जयपुर की रहने वाली मोना ने अपने खेल करियर की शुरुआत वॉलीबॉल खेलकर की थी, लेकिन उनके जीवन में एक ऐसा निर्णायक मोड़ आया जिसने उनके पूरे खेल भविष्य की दिशा बदल दी। टोक्यो पैरालिंपिक के दौरान अवनि लेखरा की शानदार सफलता को देखने के बाद मोना के मन में निशानेबाजी के प्रति गहरा आकर्षण पैदा हुआ और उन्होंने इसी खेल को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बना लिया।
अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों को याद करते हुए, मोना ने जयपुर की एकलव्य शूटिंग अकादमी से अपने कठोर प्रशिक्षण की शुरुआत की थी। करियर के शुरुआती दौर में उनके पास उच्च स्तर के आधुनिक शूटिंग उपकरण उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर इन बाधाओं को पार किया और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार और सराहनीय प्रदर्शन जारी रखा।
उनकी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं का सिलसिला तब और मजबूत हुआ जब उन्होंने सर्बिया के नोवी सैड में आयोजित डब्ल्यूएसपीएस विश्व कप और पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप-2023 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किए। इस अंतरराष्ट्रीय सफलता के बाद उन्होंने पेरिस पैरालिंपिक में भी अपने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया और देश का नाम वैश्विक मानचित्र पर रोशन किया।
अपनी उत्कृष्ट फॉर्म को बरकरार रखते हुए मोना ने हाल ही में चांगवोन प्रतियोगिता में एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक हासिल किया। इस प्रतिष्ठित पदक को जीतने के साथ ही उन्होंने आगामी वर्ष 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिल्स में आयोजित होने वाले पैरालिंपिक खेलों के लिए अपनी आधिकारिक पात्रता और क्वालिफिकेशन भी सुनिश्चित कर ली है, जो उनके खेल करियर की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।
अपनी इस लंबी और संघर्षपूर्ण यात्रा के दौरान मोना ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने मार्गदर्शक और खेल गुरु को दिया है। वह अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने कोच योगेश शेखावत को देती हैं, जिनके कुशल मार्गदर्शन, तकनीकी प्रशिक्षण और निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें एक साधारण खिलाड़ी से विश्व स्तर की प्रतिष्ठित पैरा शूटर के रूप में स्थापित किया है।
क्षेत्रीय स्तर पर खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासनिक और अकादमिक स्तर पर किए जा रहे प्रयास भी सराहनीय रहे हैं। जयपुर की एकलव्य जैसी खेल अकादमियां स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि उचित प्रशिक्षण मिलने पर क्षेत्रीय खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
भविष्य की योजनाओं और आगामी तैयारियों को ध्यान में रखते हुए, मोना अग्रवाल का पूरा ध्यान अब 2028 के लॉस एंजिल्स पैरालिंपिक की तैयारियों पर केंद्रित है। चांगवोन में रजत पदक जीतकर अपनी जगह पक्की करने के बाद, खेलप्रेमियों और देशवासियों को पूरी उम्मीद है कि वह अमेरिका में आयोजित होने वाले आगामी खेलों में देश का तिरंगा झंडा पूरी शान के साथ लहराएंगी।