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धौलपुर नगर परिषद चुनाव का दिलचस्प सियासी मोड़: बिना चुनाव लड़े भाजपा प्रत्याशी बने चेयरमैन

धौलपुर नगर परिषद के अंतर्गत एक अनूठे सियासी समीकरण के तहत, साठ वार्डों में सत्तााइस सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद कांग्रेस पार्टी चेयरमैन की कुर्सी हासिल करने से चूक गई। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी के गिरिश गर्ग ने बिना किसी वार्ड पार्षद

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Kotputli News प्रकाशित: 23 Sep 2026, 02:31 PM
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धौलपुर नगर परिषद चुनाव का दिलचस्प सियासी मोड़: बिना चुनाव लड़े भाजपा प्रत्याशी बने चेयरमैन
धौलपुर नगर परिषद चुनाव का दिलचस्प सियासी मोड़: बिना चुनाव लड़े भाजपा प्रत्याशी बने चेयरमैन फोटो आभार: Amar Ujala Rajasthan Regional Wire
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धौलपुर नगर परिषद के अंतर्गत एक ऐसा अनूठा और अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम के तहत उस दल को चेयरमैन की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा, जिसने वार्ड स्तर पर सबसे अधिक सीटों पर विजय प्राप्त की थी। यह पूरा मामला साठ वार्डों वाली धौलपुर नगर परिषद से जुड़ा है, जहां स्थानीय निकाय की सियासत ने एक बेहद दिलचस्प मोड़ लिया।

प्रारंभिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, साठ वार्डों वाले इस निकाय में कांग्रेस पार्टी ने सत्तााइस सीटों पर जीत हासिल करते हुए सदन में सबसे बड़े दल के रूप में अपनी स्थिति दर्ज कराई थी। संख्या बल के आधार पर कांग्रेस सबसे मजबूत स्थिति में थी और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते चेयरमैन की कुर्सी पर उनका दावा स्वाभाविक रूप से सबसे मजबूत है।

तमाम चुनावी समीकरणों और वार्ड स्तर पर बहुमत हासिल करने के बावजूद, कांग्रेस पार्टी धौलपुर नगर परिषद में चेयरमैन का यह मुकाबला जीतने में असफल साबित हुई। स्थानीय निकाय चुनावों की आंतरिक राजनीति और रणनीतिक समीकरणों ने ऐसा चक्रव्यूह रचा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस पार्टी सत्ता की दौड़ से बाहर हो गई।

इस संपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि भारतीय जनता पार्टी के गिरिश गर्ग को नगर परिषद का चेयरमैन चुन लिया गया। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे अधिक चर्चा है कि गिरिश गर्ग ने वार्ड पार्षद का चुनाव तक नहीं लड़ा था, फिर भी वे सर्वोच्च पद पर आसीन होने में सफल रहे।

चुनावी प्रक्रिया और नियमों के तहत तय हुई व्यवस्था के अनुसार, गिरिश गर्ग को निर्विरोध रूप से चेयरमैन चुन लिया गया। बिना किसी वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़े सीधे तौर पर नगर परिषद के शीर्ष पद पर काबिज होना इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जा रहा है, जिसने सभी को चौंका दिया।

इस अनूठे राजनीतिक खेल और समीकरण को लेकर विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों और जानकारों के बीच व्यापक चर्चा जारी है। राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के इतिहास में इस प्रकार के घटनाक्रम इस बात को रेखांकित करते हैं कि किस प्रकार वैधानिक प्रावधानों और रणनीतिक बहुमत के आधार पर अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं।

नगर परिषद के इस नए नेतृत्व के गठन और कार्यभार संभालने के पश्चात अब स्थानीय नागरिकों एवं हितधारकों की निगाहें आगामी विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज पर टिकी हैं। न तो पार्षद का चुनाव लड़ने और न ही सीधे मुकाबले में उतरने के बावजूद चेयरमैन की कुर्सी हासिल करने का यह प्रकरण लंबे समय तक राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना रहेगा।

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सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

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यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

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