बीकानेर में नवरात्रि 2026 के पावन पर्व को लेकर तैयारियां अत्यंत तेजी के साथ आगे बढ़ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में एक धार्मिक और सांस्कृतिक उत्साह का माहौल बन गया है। पुगल रोड के किनारे बालोतरा से आए हुए पारंपरिक मूर्तिकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए मिट्टी से मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमाएं तैयार करने में पूरी तरह तल्लीन हैं। कलाकारों की यह मौसमी उपस्थिति और उनके अस्थायी कार्यस्थल उस गहरी सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाते हैं जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
प्रतिमा निर्माण की यह कला पुश्तैनी कौशल, अपार धैर्य और गहरी आस्था का एक सुंदर संगम है। बालोतरा से ताल्लुक रखने वाले मूर्तिकार नारायण अपने परिवार के साथ मिलकर वर्षों से इस क्षेत्र में अपनी कला को जीवंत कर रहे हैं। इन कलाकारों के हाथ कच्ची मिट्टी और भूसे को बड़े ही कौशल से मां दुर्गा के भव्य और सजीव रूपों में ढाल देते हैं, जिसके लिए अत्यधिक शारीरिक श्रम और बारीकी की आवश्यकता होती है।
पुगल रोड के किनारे चल रहे इन निर्माण कार्यों के बीच मूर्तियों के आकार और उनकी आर्थिक संरचना का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। यहां तैयार की जा रही मूर्तियां दो से छह फीट तक की ऊंचाई वाली हैं, जिनकी कीमतें तीन हजार से आठ हजार रुपये के बीच निर्धारित की गई हैं। इन मूर्तियों की कीमत में कलाकारों की मेहनत, सामग्री की लागत और कलात्मक उत्कृष्टता का सीधा समावेश होता है, जो उनके आजीविका का मुख्य आधार है।
जमीनी हकीकत और ग्राहकों की पसंद पर चर्चा करते हुए मूर्तिकार नारायण बताते हैं कि पारंपरिक स्वरूपों की मांग हमेशा से शीर्ष पर रही है। इन कार्यशालाओं में शेर पर सवार मां दुर्गा की प्रतिमाओं की मांग सबसे अधिक दर्ज की जा रही है, जिसे भक्तगण और पंडाल आयोजक विशेष रूप से प्राथमिकता देते हैं। इस विशिष्ट प्रतिमा को तैयार करने में संरचनात्मक मजबूती और कलात्मक सुंदरता दोनों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
बीकानेर के स्थानीय आर्थिक परिदृश्य पर इन मूर्तिकारों की उपस्थिति का गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह मौसमी व्यापार क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है क्योंकि सामुदायिक आयोजक और आम नागरिक अपनी धार्मिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह इन कलाकारों पर निर्भर रहते हैं। बालोतरा से आए इन परिवारों का बीकानेर में यह प्रवास क्षेत्रीय वाणिज्यिक गतिविधियों को भी एक नई ऊर्जा प्रदान करता है।
स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय पुगल रोड जैसे व्यस्त परिवहन गलियारों के किनारे सार्वजनिक भूमि के उपयोग पर पैनी नजर रखते हैं, ताकि यातायात और सुगम आवाजाही में कोई बाधा न आए। हालांकि कलाकार अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभालते हैं, लेकिन उत्सव के इस सीजन में भीड़भाड़ को नियंत्रित करने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन भी सतर्क रहता है ताकि किसी को असुविधा न हो।
भविष्य की तैयारियों और आगामी समय की रूपरेखा को देखते हुए, नवरात्रि 2026 के आरंभ होने से ठीक पहले के सप्ताह मूर्तियों की अंतिम फिनिशिंग और उनकी डिलीवरी का मुख्य चरण होंगे। नारायण जैसे कलाकार मूर्तियों में रंगाई, सज्जा और अंतिम रूप देने के कार्यों में जुटे हुए हैं। बाजार में लगातार बनी हुई उच्च मांग को देखते हुए मूर्तिकार इस सीजन में अपनी मेहनत का सार्थक परिणाम मिलने की पूरी उम्मीद कर रहे हैं।