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Breaking News: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का दूसरा चरण: मतगणना के बीच मामूली तख्तापलट, ईवीएम फेल, और नायाब नारे
🕒 2 hours ago

वेस्ट बंगाल में 2026 के राज्य स्तर के चुनाव का दूसरा चरण आज सुबह धूमधाम से शुरू हुआ, परन्तु उत्सव के बीच कई अनपेक्षित घटनाएँ भी सामने आईं। मतदाता केंद्रों में मतदान की प्रक्रिया शुरू होते ही तमाम पोल्ट्री पार्टियों के समर्थकों का जमावड़ा देखना मिला, जबकि कुछ प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को तकनीकी गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। इस दौरान राज्य की माननीय मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख नेता ममता बनर्जी ने मतदान के बाद तत्काल ही एक तीखा बयान देते हुए लोगों को बताया कि चुनाव आयोग (ईसी) ने "आतंकवाद" की तरह कार्य किया है, जिससे लोकतंत्र की नींव को खतरा पैदा हो रहा है। उनकी इस टिप्पणी ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी चर्चा को जन्म दिया। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में प्राप्त समस्याओं को लेकर कई असंतोष के संकेत मिले। मतदाता केंद्रों में ईवीएम की झिल्ली की खराबी, बैटरी समाप्ति और स्क्रीन फ्रीज होने जैसी शिकायतें रिपोर्ट की गईं। इन समस्याओं को हल करने के प्रयास में निर्वाचन आयुक्त ने तुरंत तकनीकी दल को स्थान पर भेजा, परन्तु कई बार इनका समाधान देर से ही हुआ, जिससे मतदान प्रक्रिया में देरी हुई। इस गड़बड़ी को लेकर राष्ट्रीय मीडिया ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठाए, जबकि विपक्षी दलों ने इसे इंटीरियर मेजमेंट का एक उदाहरण बताकर कड़ी निंदा की। विरोधी दलों द्वारा मतदान स्थल पर हुए छोटे‑छोटे ढांचों में हिंसा, ध्वस्त बॉलटैबॉप, और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी दर्ज की गईं। तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता और भाजपा के बूथ के बीच झड़पें हुईं, जहाँ एक टीएमसी कार्यकर्ता पर अजीब तरह की हमला किया गया, जबकि भाजपा की एक बूथ को तोड़‑फोड़ के साथ क्षतिग्रस्त किया गया। इन घटनाओं को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत नॅशनल इंटेलिजेंस एजेंसी (एनआईए) को तैनात कर दिया, जिससे घटना स्थल की सुरक्षा को सुदृढ़ किया जा सके। इन उपायों के बावजूद मतदाता संघों ने कहा कि मतदान प्रक्रिया को बाधित करने वाले किसी भी प्रकार के कारनामे लोकतंत्र के लिए दुष्प्रभावी हैं। इन विषमता के बीच, चुनाव परिणाम की प्रारम्भिक आँकड़े दिखा रहे हैं कि सुबह 9 बजे तक 18 प्रतिशत मतदाता ही अपना वोट डाल पाए हैं। यह दर पिछले चुनाव चरणों की तुलना में कम है, जो ईवीएम समस्याओं और अस्थिर सुरक्षा माहौल को दर्शाता है। कई क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया धीमी रहने के कारण मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जिससे कई लोग मतदान केंद्र छोड़ कर घर लौट रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए ममता बनर्जी ने आज के दिन को "सड़कों पर बिताने" का निर्णय लिया, जिससे वे जनता के साथ संवाद स्थापित कर सकें और अपने पक्ष की कहानियों को जनस्तरीय बना सकें। अंत में यह कहा जा सकता है कि पश्चिम बंगाल के चुनाव का दूसरा चरण न केवल तकनीकी गड़बड़ी और सुरक्षा चुनौती के कारण जटिल बन गया, बल्कि राजनीतिक आकांक्षाओं के टकराव को भी उजागर किया। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या निर्वाचन आयोग इन समस्याओं का शीघ्र समाधान कर पाएगा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुगमता से आगे बढ़ेगी। साथ ही, ममता बनर्जी का "आतंकवाद" का आरोप और एनआईए की तैनाती यह संकेत देती है कि इस चुनाव में राजनीतिक तनाव का स्तर पहले से अधिक ऊँचा है, और परिणामों का प्रभाव राज्य की भविष्य की राजनैतिक दिशा पर गहरा पड़ेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 29 Apr 2026