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Breaking News: भारत–न्यूज़ीलैंड व्यापार समझौता: ७०% वस्तुओं को मुक्त कर शुल्क, निर्यातकों को मिलेगा बड़ा मौका
🕒 3 hours ago

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच अंततः द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौते (एफ़टीए) पर हस्ताक्षर होने को लेकर देश भर में उत्साह का माहौल बन गया है। सोमवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच इस समझौते को औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को लगभग सात दशक तक ७० प्रतिशत वस्तुओं पर शून्य शुल्क का लाभ मिलेगा। ऐसा कहा जा रहा है कि यह कदम न केवल वस्तु व्यापार को बढ़ावा देगा, बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग और क़ृषि उत्पादों की निर्यात क्षमता को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा। इस समझौते से भारत को न्यूज़ीलैंड के खुले बाजार में प्रवेश का अवसर मिलेगा, जबकि न्यूज़ीलैंड को भारतीय उपभोक्ताओं के बड़े बाजार में अपनी पहुँच बढ़ाने का लाभ होगा। विस्तृत जानकारी के अनुसार, समझौते के तहत भारतीय वस्तुओं में कृषि उत्पाद, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्नोलॉजी से जुड़ी वस्तुएँ और क़ृषि-उत्पादों के साथ ही चमड़े और चमड़ा-उत्पादों को शून्य शुल्क प्रदान किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय किसानों और छोटे उद्योगपतियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी, क्योंकि इससे निर्यात लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिलेगी। व्यापार विशेषज्ञों ने बताया कि न्यूज़ीलैंड की हाई-टेक और एग्रो-टेक नॉलेज को भारत के उभरते हुए स्टार्ट‑अप्स और भारी उद्योगों के साथ जोड़कर दोनों पक्षों को नई संभावनाएं मिलेंगी। विस्तार में इस समझौते का आर्थिक प्रभाव भी स्पष्ट है। पिछले साल के आँकों के अनुसार दोनों देशों के बीच का व्यापार लगभग ४५ अरब डॉलर तक पहुंच चुका था, जिसमें भारत की निर्यात भागीदारी लगभग ५० प्रतिशत थी। अब शून्य शुल्क के लागू होने के बाद इस आंकड़े को दो गुना तक बढ़ाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस कदम को "व्यापार की नई दिशा" के रूप में श्रेय दिया है और कहा है कि यह भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'एक्सपोर्ट इम्प्रूवमेंट' पहल को सुदृढ़ करेगा। समापन में यह कहा जा सकता है कि भारत‑न्यूज़ीलैंड एफ़टीए न केवल व्यापारिक आँकड़ों में सुधार लाएगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को गहरा करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को नई बाज़ार उपलब्धियों के साथ-साथ क़ृषि एवं उत्पादन क्षेत्र में स्थिरता भी मिलेगी। अंत में यह देखा जाएगा कि इस समझौते के सफल कार्यान्वयन से भविष्य में और भी बहुपक्षीय मुक्त व्यापार समझौतों के लिए एक मजबूत मॉडल तैयार होगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Apr 2026