राघव चढ़ा, जो एएपी के वरिष्ठ नेता थे, ने अपने छह राज्य सभा सांसदों के साथ भाजपा में प्रवेश कर लिया। इस कदम से एएपी में बड़ा झटका लगा और पार्टी के अंदर अफ़रातफरी बढ़ी। कई विश्लेषकों का मानना है कि चढ़ा का यह कदम एएपी में नेतृत्व के भीतर मतभेदों और असंतोष का परिणाम है। इस फैसले ने एएपी के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं और आगामी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। चढ़ा की भाजपा में शिफ्टिंग से राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।