संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हफ्ते के शुरुआती दिनों में हार्मुज जलमार्ग पर संभावित टोल लगाकर ईरान के परमाणु समझौते में विफलता पर प्रतिक्रिया देने की बात कही। ट्रम्प ने कहा कि यदि ईरान वार्ता में बाधा डालता है तो अमेरिका इस रणनीतिक मार्ग पर स्वयं को 'रक्षक' के रूप में प्रस्तुत करके टोल इकट्ठा कर सकता है। उन्होंने इसे "गार्जियन एंजेल" की भूमिका भी कहा, जिससे पता चलता है कि वह अमेरिका को इस जलमार्ग को सुरक्षित रखने वाला मानते हैं। इस बयान के बाद विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव की कानूनी और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा शुरू कर दी। ट्रम्प का यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत कितनी वैधता रखता है, इस पर बहस तेज़ हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि हार्मुज जलमार्ग पर टोल लगाने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के नियमों के विरुद्ध जा सकती है, क्योंकि यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय जल है और किसी एक राष्ट्र के अधिकार में नहीं आता। दूसरी ओर, कुछ नीति विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार का आर्थिक दबाव ईरान को वार्ता में अधिक समझौता करने के लिए मजबूर कर सकता है, विशेषकर जब इस मार्ग से गुजरने वाले वैश्विक तेल और गैस के आयतन को देखते हुए इसका आर्थिक महत्व अत्यधिक है। हिंदुस्तान तथा मध्य पूर्व के कई देशों ने इस प्रस्ताव पर सावधानीपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा कि वह समुद्री व्यापार के खुले संचालन की वकालत करता है और किसी भी देश द्वारा एकतरफा टोल लगाए जाने के खिलाफ है। जबकि ईरान ने इस बात पर बल दिया है कि वह अपने जल में किसी भी बाहरी दबाव को बर्दाश्त नहीं करेगा और यदि जरूरत पड़ी तो वह जलमार्ग को बंद कर देगा, जैसा कि पूर्व में किया गया था। इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हल्की उलझन दिखी, किंतु तेल की कीमतों में कोई बड़ी उछाल नहीं दिखी, क्योंकि बाजार ने पहले से ही इस तरह के संभावित जोखिम को मूल्य में शामिल कर लिया था। अंत में यह कहा जा सकता है कि ट्रम्प का हार्मुज टोल प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय राजनयिक और आर्थिक परिदृश्य में नई जटिलता जोड़ता है। यदि ईरान के साथ समझौता विफल हो जाता है, तो इस प्रकार के अनौपचारिक आर्थिक कदमों से समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है। विश्व समुदाय को इस मुद्दे पर सतर्क रहना चाहिए और सभी पक्षों को वार्ता के माध्यम से शांतिपूर्ण समाधान खोजने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि हार्मुज जलमार्ग जैसी महत्वपूर्ण कड़ी पर अनावश्यक तनाव और आर्थिक बोझ से बचा जा सके।