धारा जलते शहर धाका में हाल ही में बड़े पैमाने पर एक विरोध प्रदर्शन हुआ, जहाँ हिंदू समुदाय ने सैकड़ों लोगों को इकट्ठा किया और "जय श्री राम" के नारे गूँजाए। यह आंदोलन उस अनुशासन में पाया गया जिसमें कुछ सामुदायिक समूहों ने कहा कि बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा और तस्वीर का अपमान किया गया है। इस कारण से कई हिन्दु विद्यार्थी, धर्मगुरु और सामाजिक कार्यकर्ता धारा के विभिन्न कोनों में एकत्रित होकर, शहर के मुख्य गली और विश्वविद्यालय के आसपास जुलूस निकाला, जिससे सार्वजनिक स्थानों में अराजकता उत्पन्न हुई। स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन को रोकने के लिये सुरक्षा बल तैनात किया, परन्तु भीड़ की तीव्रता के कारण कई क्षेत्रों में यातायात बंद करना पड़ा। पृष्ठभूमि में यह कहा जा रहा है कि बांग्लादेश के एक निजी स्कूल में स्थापित राम की प्रतिमा को बिगड़ा हुआ पाया गया, जिससे समाज में गहरा धक्का लगा। इस घटना पर उन्होंने आरोप लगाया है कि यह काम बिन अनुमति के किया गया था और उसे पुनर्स्थापित करने की मांग की गई। इस वजह से धाका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठाई और उन्होंने दावे किया कि राम की प्रतिमा को पुनर्स्थापित किया जाए और लम्बे समय से रुके हुए राम प्रतिमा निर्माण परियोजना को फिर से शुरू किया जाए। कई छात्र संगठनों ने कहा कि धार्मिक भावनाओं की अपमानजनक घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता, इसलिए उन्होंने विरोध में भाग लेकर इस समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की। प्रदर्शन के दौरान कई जनसंख्या ने सड़कों को बंद करके, ध्वज लहराते हुए और बंद शब्दावली में "जय श्री राम" चिल्लाते हुए अपने असंतोष को प्रकट किया। इस आंदोलन ने बांग्लादेशी मीडिया में भी बड़ी दिलचस्पी जगाई, जहाँ विभिन्न संगठनों ने इस मुद्दे पर अपने-अपने विचार रखे। कुछ समूहों ने कहा कि यह धार्मिक त्रासदी केवल एक छोटी घटना है, जबकि अन्य ने इसको बांग्लादेश सरकार की नीतियों के खिलाफ एक संकेत मानते हुए कड़ा विरोध किया। स्थानीय प्रशासन ने इस मामले को लेकर चौंकते हुए कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिये कड़े कदम उठाए जाएंगे और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धार्मिक सहिष्णुता बनी रहे। अंत में यह कहा जा सकता है कि धाका में यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि यह भारतीय और बांग्लादेशी धार्मिक एवं सांस्कृतिक तनाव को भी उजागर करता है। ऐसे मुद्दे जनता के बीच सामाजिक सद्भावना को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए दोनों देशों को मिलकर इस तरह की घटनाओं को सुलझाने के लिये संवाद और कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए। यदि इस तरह के मुद्दों का समाधान शीघ्र नहीं किया गया, तो भविष्य में इससे बड़े सामाजिक असंतोष और हिंसा का जोखिम उत्पन्न हो सकता है। इस क्रम में इस मुद्दे की सच्ची जाँच, न्यायसंगत समाधान और धार्मिक मनोविज्ञान को समझते हुए समझौते की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।