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Breaking News: संजय राउत ने बगावती विधायक को किया दांव, सुप्रीम कोर्ट को भी डाल दिया दायरा
🕒 2 hours ago

मुंबई के राजनीति परिदृश्य में आज एक नई उथल-पुथल छा गई है। उधव ठाकरे के प्रतिद्वंद्वी दल, उधव थाकरे के समर्थकों का समूह, के वरिष्ठ सदस्य संजय राउत ने बगावती सांसदों को खुला उपदेश दिया और साथ ही सुप्रीम कोर्ट को भी जिम्मेदार ठहराया। यह बयान इस हद तक गंभीर हो गया कि कई सांसदों ने संसद के समिति सभा में भाग नहीं लिया, जिससे राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ी है। राउत ने कहा कि बगावती सांसदों का यह कदम न केवल दल को कमजोर कर रहा है, बल्कि संविधान के सर्वोच्च न्यायालय को भी लापरवाही के कारण दोषी ठहराया जा रहा है। उनका कहना है कि जब तक कोर्ट अपने निर्णयों को सही ढंग से लागू नहीं करता, तब तक राजनीतिक दलों की आंतरिक समस्याएँ बढ़ती रहेंगी। इस बीच, कई शिब ने उधव थाकरे के विधायक, विशेषकर सिवा-यूट (UBT) के सदस्य, शिंदे के साथ विलय की बात कर रहे हैं, जिससे महाराष्ट्र के राजनैतिक समीकरण और जटिल हो रहे हैं। सत्र में उपस्थित विभिन्न मीडिया स्रोतों ने बताया कि बगावती सांसदों ने 'ऑपरेशन टाइगर' नामक योजना के तहत कई महत्वपूर्ण संसद कार्यवाही और समिति सभा से अनुपस्थित रहना चुना। यह कदम न केवल उनकी प्रतिनिधित्व क्षमता को सवालों के घेर में डाल रहा है, बल्कि उसके पीछे छिपे दलीय तनाव भी स्पष्ट हो रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कई नेता और विश्लेषक अब सवाल कर रहे हैं कि क्या इस प्रकार की असंतुष्टि महाराष्ट्र की राजनीति में नई उलटफेर की ओर ले जाएगी। निष्कर्षतः, संजय राउत का यह बयान और बगावती सांसदों की अनुपस्थिति एक ऐसे मोड़ पर ले आती है जहाँ राजनीतिक दलों को अपनी आंतरिक समस्याओं का समाधान ढूँढना आवश्यक है। यदि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसलों को प्रभावी रूप से लागू नहीं करता, तो ऐसी राजनीतिक धारा अनिवार्य रूप से और अधिक उथल-पुथल का कारण बन सकती है। इस स्थिति में महाराष्ट्र के राजनैतिक परिदृश्य में नए गठबंधन, विलय और संघर्ष की संभावनाएं स्पष्ट रूप से सामने आ रही हैं, और यह देखना रहेगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को कैसे सुलझाया जाता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 18 Jun 2026