लोकसभा के अहम बहारामपुर सांसद पद को लेकर राजनीतिक घोُरघो़ के बीच, एक नई खबर ने भीड़ को और अधिक हिलाकर रख दिया है। कई साक्षात्कार और रिपोर्टों में यह कहा गया था कि भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान और अब कांग्रेस के नेता सौऱव गांगुली ने यूसुफ़ पाथान को मांता बैनर्जी के लिये अपना स्थान त्यागने का आग्रह किया था। इस दावा को लेकर दो खंडों में तीखा विरोध भड़का, लेकिन पिछले दो हफ्तों में गांगुली ने मीडिया के सामने खुलकर इस बात को खारिज किया, जिससे यह मामला फिर से स्फीति पर आया है। गांगुली ने एक प्रमुख समाचार चैनल के साथ साक्षात्कार में कहा कि जब उन्हें यह अफवाह सुनाई दी थी, तो वह तुरंत अपने दल के वरिष्ठ नेताओं से बात कर साफ़ करवा ली। उन्होंने बताया कि वह कभी भी किसी को निजी कारणों से अपने राजनैतिक दायित्वों से हटाने का आग्रह नहीं करते। "मैंने यूसुफ़ पाथान को कभी नहीं कहा कि वह अपना सीटा छोड़ दे। यह पूरी तरह से बिना आधार वाला अफवाह है," गांगुली ने कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह मांता बैनर्जी के साथ कार्य करने में पूरी तरह से सम्मानित हैं, परन्तु किसी भी व्यक्तिगत या पार्टी के अंदरूनी निर्णय में बाहरी दबाव नहीं डालते। जहां गांगुली ने अपने बयानों में संकोच नहीं दिखाया, वहीं कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इस मुद्दे की सरहद पर सवाल उठाए। वे मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी के भीतर कुछ उच्च स्तर के नेता इस तरह के राजनैतिक कदमों को लेकर विचार विमर्श कर रहे थे, जिससे पार्टी को राज्य के महत्वपूर्ण सीटों में लाभ हो सके। लेकिन गांगुली ने इस सबको "सिर्फ अटकलों" का हिस्सा बताया और कहा कि पार्टी में निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार लिये जाते हैं, ना कि किसी एक व्यक्ति के व्यक्तिगत इच्छानुसार। इस बीच, यूसुफ़ पाथान ने भी अपनी ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया, परन्तु विभिन्न स्रोतों ने बताया कि उन्होंने इस मामला को जबरदस्ती नहीं माना और अपनी संसद कार्यवाही जारी रखी है। बहारामपुर में असफलता के बाद मांता बैनर्जी ने इस सीट को अपने पक्ष में सुरक्षित रखने की संभावना जताई, परन्तु यह स्पष्ट हुआ कि गांगुली ने इस निर्णय में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। निष्कर्षतः, यह स्पष्ट है कि सौऱव गांगुली ने यूसुफ़ पाथान को मातर बैनर्जी के लिये सीट खाली करने का आरोप निरस्त किया है और इसे अफवाह के रूप में खारिज किया है। राजनीतिक माहौल में अक्सर धुंधली बातों को सच्चाई में बदलने की कोशिश रहती है, परन्तु गांगुली के स्पष्ट बयान ने इस घोटाले को बहुत हद तक कमज़ोर किया है। आगे चलकर यह देखना होगा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को किस प्रकार संभालती है और क्या यह घोटाला किसी वास्तविक राजनैतिक बदलाव की ओर इशारा करता है या केवल एक उथल‑पुथल की हवा है।