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Breaking News: सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर प्रहरियों की भीड़: पत्थर, अंडे और आहत सुरक्षा, TMC ने लगाया आरोप
🕒 11 hours ago

सोनारपुर, दक्षिण बंगाल में पिछले रविवार को एक तीव्र तनावपूर्ण दृश्य ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। ट्रेड यूनियन मंत्री अभिषेक बनर्जी, जो टीएमसी के मुख्य रणनीतिकार हैं, अपने कार्य संबंधी यात्रा के दौरान स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता के घर पहुंचे तो उनका सामना असह्य अपमान और शारीरिक हिंसा से हुआ। नागरिकों ने उन पर पत्थर और कच्चे अंडे फेंके, जिससे कई लोगों को चोटें आईं और सुरक्षा कर्मियों को भी घुटन महसूस करनी पड़ी। घटनास्थल पर मौजूद पुलिस और सुरक्षा दलों को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा, परन्तु भीड़ की उग्रता को रोकना कठिन साबित हुआ। कई गवाहों ने बताया कि स्थानीय लोग बनर्जी के प्रति गहरी नाराज़गी व्यक्त कर रहे थे, और कई स्थानों पर "चोर, चोर" का नारा जारी किया गया। यह विरोध विशेषकर इस कारण से उत्पन्न हुआ कि बनर्जी को कई सैयद के अग्नि संस्थानों में भ्रष्टाचार और अस्थायी नौकरियों के असंतोष के कारण निंदा किया जा रहा था। इस बीच, टीएमसी सांसद ने कहा कि यह घटना सत्ता में रहने वाले प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा उत्तेजना का परिणाम है, और उन्होंने स्थानीय पुलिस से न्यायी कार्रवाई की मांग की। वीडियो रिपोर्टों में दिखाया गया कि बना रहस्य नहीं है: अभिषेक बनर्जी को एक कंक्रीट के दरवाजे के पास थोप दिया गया, जब वह बात करने का प्रयास कर रहे थे तो उनका चेहरा कच्चे अंडे और पत्थर के प्रहार से पिट गया। घटनास्थल पर मौजूद कई पार्टी कार्यकर्ता भी इस झटके से गिर पड़े। इस दौरान स्थानीय लोगों ने तेज़ आवाज़ में आरोप लगाते हुए कहा कि बनर्जी ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए गरीबों के मुद्दे को नजरअंदाज किया है। ट्रांसपोर्ट बैरियर से बाहर निकलते ही बनर्जी ने जनता को शांति से बात करने का अपील किया, परन्तु भीड़ के उग्र स्वर ने उसे मौन कर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की हिंसक प्रतिक्रिया अक्सर राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बढ़ते तनाव और शहरी क्षेत्रों में सामाजिक असंतोष के मिश्रण से उत्पन्न होती है। स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद तुरंत जांच शुरू कर दी है और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अंत में यह स्पष्ट है कि सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले ने राजनीतिक माहौल को और भी उथल-पुथल में डाल दिया है। जबकि टीएमसी पार्टी ने इस घटना को विपक्षी दलों की साजिश बताया है, जनता की असंतुष्टि और स्थानीय समस्याओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक तथ्यों का समुचित परीक्षण आवश्यक होगा, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में विश्वास बना रहे और जन आशावाद फिर से स्थापित हो सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 May 2026