हिंदुस्तान टाइम्स सहित कई प्रमुख समाचार साइटों पर आज सीयूईटी (सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के दौरान हुए गंभीर तकनीकी विघ्न ने फिर से विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा को असंतुलित किया है। नॉएडा के एक परीक्षा केंद्र में कंप्यूटर सिस्टम की गड़बड़ी के कारण कई लाख उम्मीदवारों को लंबे समय तक निराशा झेलनी पड़ी। छात्रों ने बताया कि परीक्षा शुरू होने के बाद ही स्क्रीन फ्रीज हो गई, डेटा लोड नहीं हो रहा था और कई बार कनेक्शन टूट जाता था, जिससे कई उम्मीदवारों को अपने उत्तर कागज पर लिखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इस अनपेक्षित तकनीकी समस्या के चलते छात्रों को परीक्षा केंद्र में कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ को ही परीक्षा समाप्त होने का मौका ही मिला। इस बीच, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने दोपहर के सत्र का समय बदलकर पुनः निर्धारित किया, लेकिन यह बदलाव भी कई छात्रों के लिए भ्रम और असुविधा का कारण बना। इन विसंगतियों के बीच, आज दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को किनारे पर रखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि "एक सशिक्षित प्रधानमंत्री की जरूरत है" और सीयूईटी जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में इस तरह की गड़बड़ियों को दोहराने से देश की शैक्षिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचता है। केजरीवाल ने यह भी उजागर किया कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के बुनियादी पहलुओं को नजरअंदाज किया है और ऐसी समस्याओं को हल करने के लिए उचित नीतियों की कमी है। इस टिप्पणी पर कई राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की मांग पहले से ही कई बार की गई है, परन्तु सरकार की अति तेज़ी से लागू की गई नीतियों ने अक्सर कार्यान्वयन में कमी छोड़ी है। इसी दौरान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने आधिकारिक तौर पर परीक्षा की पुनःशेड्यूलिंग की घोषणा की। नई तारीखें 31 मई, 6 एवं 7 जून निर्धारित की गईं, जबकि देर रात की घोषणा ने कई छात्र और अभिभावकों को हैरान कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कई अभ्यर्थियों ने अपने घर-परिवार को लेकर आर्थिक कठिनाइयों और यात्रा प्रबंधों की समस्या को उजागर किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि तकनीकी गड़बड़ी केवल एक छोटा मुद्दा नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रणालीगत समस्या है। इन घटनाओं के उजागर होने पर विभिन्न राजनैतिक दलों ने भी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी और केजरीवाल ने मिलकर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि "विश्वगुरु" का दावा करने वाले नेता को विश्वसनीय शैक्षणिक ढांचा बनाना चाहिए। वहीं, शिक्षा मंत्रालय ने प्रतिपालन किया कि तकनीकी टीम ने तुरंत समस्या को ठीक करने के लिए कार्यवाही शुरू कर दी है और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों से बचने के लिए अतिरिक्त उपाय किए जाएंगे। अंत में, यह घटना यह बताती है कि परीक्षा केंद्रों में तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता और प्रबंधन की सख्ती कितनी महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों के भविष्य को निर्धारित करने वाली राष्ट्रीय परीक्षाएं सुगम और पारदर्शी ढंग से आयोजित हों, इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को सहयोग करना आवश्यक है। तभी यह कहा जा सकेगा कि भारत में शिक्षा प्रणाली वास्तव में "शिक्षित प्रधानमंत्री" की वकालत को साकार कर रही है।