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Breaking News: टीएमसी के अभिषेक बनर्जी पर फिर से ढीला पड़ गया झंझट: साक्ष्य‑भ्रम के केस में CID ने बुलाया गया
🕒 12 hours ago

कॉलकाता के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रमुख प्रवक्ता अभिषेक बनर्जी को फिर एक बार दवाब में ले आया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सिड (क्रिमिनल इन्क्वायरी डिवीजन) ने उन्हें घोटाले के संदर्भ में बुलाया है, जिसमें एक फर्जी हस्ताक्षर के आरोप लगे हैं। यह मामला तब उभरा जब स्थानीय अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी के पुत्र को एक दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करते हुए पाया, जो वास्तविकता से कई तथ्यों में असंगत था। जांच अधिकारी अब इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि क्या यह हस्ताक्षर वास्तव में बनर्जी द्वारा किया गया था या किसी ने नकली रूप में बनाया है। तदुपरांत, अभिषेक बनर्जी को प्रतिवाद के रूप में कई बार विरोधियों को सड़कों पर बॉल के साथ और पत्थर भी फेंकते हुए देखा गया। यह घटनाक्रम स्थानीय लोगों की असंतोष को भी उजागर करता है, जिन्होंने 'चोर, चोर' का नारा लगाते हुए उनका विरोध किया। इस बीच, अभिषेक बनर्जी ने अपनी निरंतरता बनाए रखी है और कहा है कि वह अपने पार्टी के सिद्धांतों के लिए खड़े रहेंगी, चाहे उनके खिलाफ कितनी भी जांच या प्रदर्शन हो। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पॉलिटिकल वाले का समर्थन करने में कोई कमी नहीं रखी है, और किसी भी प्रकार के दवाब से उनके कार्य में बाधा नहीं आएगी। केस की तह में पहुंचते हुए, सिड ने अभिषेक बनर्जी को कई प्रश्नावली के साथ उन पर लगे षड्यंत्र के सभी पहलुओं को स्पष्ट करने का निर्देश दिया। इस में उनके निजी दस्तावेज़, हस्ताक्षर के नमूने और अन्य संबंधित कागजात शामिल हैं। जब यह मामला अदालत में पहुँचा तो अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे और उनके खिलाफ लगाई गई कोई भी फर्जी आरोप को ध्वस्त करेंगे। उनका दावा है कि यह पूरी साज़िश उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदियों द्वारा तैयार की गई है, जो उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। इन सभी घटनाओं के बाद, टेलीग्राफ इंडिया और टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ सार्वजनिक स्थान पर भी असहज माहौल पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई स्थानीय लोग उनके घर के बाहर उनके साथ शारीरिक टकराव भी कर चुके हैं। इस स्थिति को देखते हुए, अभिषेक बनर्जी ने अपनी सुरक्षा का इंतजाम किया और कहा कि वह इस प्रकार के दबाव के बावजूद अपने पार्टी के कार्यों को जारी रखेंगे। अंत में, यह स्पष्ट है कि अभिषेक बनर्जी का वर्तमान राजनीतिक सफर कई चुनौतियों से भरा हुआ है। फर्जी हस्ताक्षर के मामले में सिड के सामने उनका सामना अभी भी अनिश्चित है, परन्तु उनका दृढ़ निश्चय और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता यह दर्शाती है कि वे अपनी पार्टी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बने रहेंगे। इस विवाद का अंतिम परिणाम अभी नहीं आया है, परन्तु यह देखना बाकी है कि आगे की जांच में कौन सी नई सच्चाई सामने आती है और किस दिशा में अभिषेक बनर्जी का राजनीतिक भविष्य विकसित होता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 May 2026