एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब एक पत्रकार ने खुला सवाल किया, "क्या पाकिस्तान इसराइल को मान्यता देगा?", तो पाकिस्तान के वरिष्ठ वित्त मंत्री इशाक दार ने तुरंत प्रतीक्षा नहीं की और उस प्रश्न को दृढ़ता से खारिज कर दिया। दार के साथ अमेरिकी कांग्रेस सदस्य मारियो रूबियो भी उपस्थित थे, पर दोनों ने सवाल को नज़रअंदाज़ करके मंच से ही हट कर जनता को यह संदेश दिया कि पाकिस्तान की विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। यह घटना न केवल विश्व मीडिया की नजरों में आई, बल्कि इस मुद्दे पर विभिन्न विश्लेषकों ने भी अपने-अपने विचार रखे। इशाक दार ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान का फिलिस्तीन के प्रति समर्थन अटल है और इसराइल को मान्यता देना पाकिस्तान के मौलिक सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पाकिस्तान ने अब्राहम समझौते में कोई परिवर्तन नहीं किया है और विदेशी नीतियों में स्थिरता बनाए रखने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहा है। इस दौरान, रूबियो ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर संकल्पों की दृढ़ता दिखानी चाहिए और किसी भी दबाव की स्थिति में पाकिस्तान का मूल मार्ग नहीं बदल सकता। पाकिस्तान के विदेश नीति में इसराइल के संबंध में किसी भी प्रकार की सॉफ्टनिंग की आशंका कई देशों में फैली है, पर दार और रूबियो की दृढ़ प्रतिक्रिया ने इस डर को कम किया। समानांतर रूप से, फिलिस्तीनी जनता की मदद के लिए गाज़ा में शांति योजना के पूर्ण कार्यान्वयन की मांग भी जोर पकड़ रही है। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस बात को दोहराया है कि पाकिस्तान का यह स्थिर रुख क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इन घटनाओं को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान अभी भी अपने ऐतिहासिक गठबंधनों और सिद्धांतों से बंधा हुआ है। इशाक दार का यह बयान न केवल घरेलू जनता को आश्वस्त करता है, बल्कि विश्व समुदाय को भी यह संकेत देता है कि पाकिस्तान फिलिस्तीन में न्याय की मांग में अपना समर्थन जारी रखेगा। इस प्रकार, पाकिस्तान की विदेश नीति में इसराइल को मान्यता नहीं देना, एक स्पष्ट और अपरिवर्तनीय स्थिति के रूप में सामने आया है।