वर्तमान में अमेरिका के पूर्व अध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इरान के साथ संभावित समझौते के बारे में किए जा रहे नई दावों को कई विश्वसनीय स्रोतों ने कड़े शब्दों में खंडित कर दिया है। फर्स न्यूज़ ने बताया कि इरान पर डॉलर प्रतिबंधों को हटाने, परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने या अन्य मौद्रिक लाभों का वादा करके संभावित समझौते की बात को ट्रम्प ने फिर से उजागर किया था, परन्तु इन दावों का कोई आधिकारिक दस्तावेज़ या पुष्टि नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय और व्हाइट हाउस के उच्चस्तरीय अधिकारियों ने इन बातों को सार्वजनिक रूप से नकारा है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि इस विषय पर कोई ठोस बातचीत नहीं चल रही है। ऐसे में यह खबर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों में विस्तृत रूप से प्रकाशित हुई है। द हिंदु ने बताया कि व्हाइट हाउस में उच्च स्तर की बैठकें होने वाली थीं, जहाँ इरान के साथ अंतिम निर्णय पर चर्चा करने की उम्मीद थी, परन्तु बाद में इन बैठकों को स्थगित कर दिया गया। टाईम्स ऑफ इंडिया ने इस मुद्दे को "अस्थायी श्वास" कहा, यह दर्शाते हुए कि इस तरह की घोषणा केवल राजनैतिक दर्शक को आकर्षित करने का एक माध्यम हो सकती है। एक्सियोस और न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, इरान‑अमेरिका बीच समझौते की बात तो रही, परन्तु अंतिम स्वीकृति के लिये ट्रम्प की स्वीकृति अनिवार्य मानी गई थी, जिसे अब तक नहीं दिया गया। इन बहसों के बीच विशेषज्ञ यह संकेत दे रहे हैं कि इरान के साथ किसी भी प्रकार के समझौते के लिये पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प के विचारों से अधिक, वर्तमान प्रशासन की नीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की ढांचा अधिक महत्वपूर्ण होगी। इस मुद्दे पर एक और प्रमुख पहलू यह है कि इरान की ओर से भी इस प्रकार के किसी समझौते को लेकर संकोच दिखाया गया है, क्योंकि वे अपने रणनीतिक हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं। इस सन्दर्भ में कई विश्लेषकों ने कहा कि किसी भी प्रकार की घोषणा को सटीक तथ्यों और औपचारिक दस्तावेज़ों के बिना करना अनियंत्रित अराजकता को जन्म दे सकता है। निष्कर्षतः, ट्रम्प द्वारा उठाए गए इरान समझौते के दावे के पीछे संभवतः नीति भ्रम या राजनीतिक लाभ उठाने का इरादा हो सकता है, परन्तु वास्तविकता में किसी भी आधिकारिक प्रगति या औपचारिक प्रोटोकॉल को अभी तक नहीं माना गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि इरान‑अमेरिका संबंधों में स्थायी परिवर्तन तभी संभव है जब दोनों पक्षों के बीच पारदर्शी संवाद और विश्वसनीय प्रतिबद्धताएँ स्थापित हों। इस संदर्भ में ट्रम्प के दावों को नज़रअंदाज़ कर, वास्तविक कूटनीतिक प्रक्रिया पर ध्यान देना ही भविष्य की शांति और स्थिरता का मूल मंत्र है।