संघ मंत्री धर्मेंदु प्रधान ने हाल ही में सीबीएसई के ऑन‑स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) में सामने आयी बड़ी गड़बड़ी पर पूर्ण जिम्मेदारी लेने का कदम उठाया। यह घोषणा दिल्ली में आयोजित एक विशेष समन्वय बैठक में की गई, जहाँ शिक्षा बोर्ड के अधिकारियों, राज्य सरकारों और साक्षरता के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी समस्याएं प्रस्तुत की थीं। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि ओएसएम प्रणाली में हुई त्रुटियों ने विद्यार्थियों के भविष्य को अनिश्चित बना दिया है और इसे सुधारने के लिए तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषी अधिकारी, तकनीकी कर्मी और सभी जुड़े हुए लोग कानून के कठोर दायरे में लाए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी ही चूक दोबारा न दोहराई जा सके। ओएसएम प्रणाली में अंक निर्धारण के दौरान कई तकनीकी खराबियां और मानवीय चूक देखी गईं, जिससे कई विद्यार्थियों के परिणाम गलत निकल आए। इस दुविधा ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों में बड़े पैमाने पर गुस्सा और असंतोष उत्पन्न कर दिया है। कई स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक इस बात से निराश थे कि डिजिटल अंकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही, और कई बार मानदंडों की अनदेखी की गई। विभिन्न माध्यमों में इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्टें प्रकाशित हुईं, जिनमें बताया गया कि कुछ बिंदुओं पर अंक अधिक या कम दर्ज हो रहे थे, जिससे विद्यार्थियों के चयन में बाधा उत्पन्न हुई। धर्मेंदु प्रधान ने इस समस्या के समाधान हेतु तीन प्राथमिक कदमों की घोषणा की। पहला, एक स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और न्यायिक व्यक्तियों का सहयोग रहेगा, ताकि त्रुटियों के स्रोत और जिम्मेदारियों का पता लगाया जा सके। दूसरा, दोषी कर्मियों को तत्काल निलंबित कर उन्हें सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। तीसरा, ओएसएम प्रणाली को सुधारने के लिए नई तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों से बचा जा सके। इसके साथ ही, प्रभावित छात्रों को पुनः मूल्यांकन का विकल्प भी दिया जाएगा, ताकि उनके वास्तविक योग्यता को सही रूप से प्रस्तुत किया जा सके। शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस विकास को सकारात्मक रूप से सराहा, परन्तु उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ कड़ी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; प्रणाली को मूल रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्हें उम्मीद है कि नई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता, डेटा सुरक्षा और समयबद्धता के उच्च मानक स्थापित किए जाएंगे। अंत में, धर्मेंदु प्रधान ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को सच्चे ज्ञान और न्यायपूर्ण मूल्यांकन प्रदान करना है, और इस दिशा में सरकार सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। इस प्रतिबद्धता ने देश के छात्रों और अभिभावकों में आशा की किरण जगाई है, और शिक्षा में विश्वास को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।