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Breaking News: राहुल गांधी की सीबीएसई में अनुबंध विवाद: इनकार जवाब नहीं, मांग रहे स्पष्ट जवाब
🕒 2 days ago

राहुल गांधी ने हाल ही में सीबीएसई द्वारा कोएम्प्ट एजु टेक के साथ किए गए अनुबंध को लेकर उठाए गए सवालों को निरस्त करने के बाद तीखा बयान दिया। उनका मानना है कि इनकार ही जवाब नहीं हो सकता और सरकार को इस मुद्दे में पूरी पारदर्शिता दिखानी चाहिए। यह विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने एक रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि सीबीएसई ने कोएम्प्ट एजु टेक को बड़ी धनराशि देकर परीक्षा प्रणाली में हेरफेर करवाया है। इस बात को लेकर विपक्ष और शैक्षिक अभिभावकों में गह़राई बहस छिड़ गई, जबकि सीबीएसई ने तुरंत इन दावों को खारिज किया। विपक्षी नेता ने कहा कि कोएम्प्ट एजु टेक के साथ सीबीएसई का अनुबंध न केवल अनावश्यक है बल्कि यह परीक्षा के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इस पर धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री, ने स्पष्टीकरण देकर कहा कि यह अनुबंध पूर्णतः वैध है और इसका कोई भी उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में दखल नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कोएम्प्ट एजु टेक को केवल तकनीकी सहायता प्रदान करने का काम सौंपा गया था, जिससे ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाया जा सके। फिर भी, राहुल गांधी ने इस बात को स्वीकार नहीं किया और कहा कि "इनकार ही जवाब नहीं है, हमें तथ्यात्मक जवाब चाहिए"। आगे चलकर कई शैक्षणिक विशेषज्ञों ने भी इस मुद्दे पर अपना मत रखा। कुछ ने कहा कि यदि ऐसी बड़ी रक़म का अनुबंध निजी कंपनी को दिया जाता है तो उसके निरक्षण के उपायों को स्पष्ट करना आवश्यक है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों ने यह कहा कि कोविड-19 के बाद ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली का विस्तार जरूरी था और इस कारण से कोएम्प्ट एजु टेक को तकनीकी सहयोग देना समझदारी भरा कदम था। इस बीच, छात्र और अभिभावक भी इस विवाद से चिंतित हैं क्योंकि उनका मानना है कि परीक्षा की शुद्धता पर सवाल उठने से उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है। समग्र रूप से देखे तो यह विवाद न सिर्फ एक शैक्षणिक मुद्दा बन गया है, बल्कि यह राजनीति में भी एक गर्म जलवा बन गया है। राहुल गांधी का अधिक पारदर्शिता का आग्रह और सरकार की रक्षा करने की कोशिश इस बात को स्पष्ट करती है कि शैक्षिक नीतियों में कैसे राजनैतिक टकराव उत्पन्न हो सकता है। आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना बाकी है, परन्तु इस मामले में सभी पक्षों को तथ्यों के आधार पर ही चर्चा करनी चाहिए, ताकि देश के शैक्षणिक ढांचे में भरोसा बना रहे.

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✍️ By Pradeep Yadav | 28 May 2026