हॉरमुज जलडमरूमध्य, जो मध्य एशिया की तेल और गैस की सबसे प्रमुख शिपिंग लाइनों में से एक है, इरान के राज्य टीवी ने बताया कि अगर दोनों पक्षों के बीच निर्धारित शर्तें स्वीकार कर ली गईं तो यह जलडमरूमध्य एक महीने के भीतर फिर से खुल सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, क्योंकि व्यापारियों ने अपेक्षा जताई कि इस रणनीतिक मार्ग की पुनः खोलने से समुद्री परिवहन में बाधाएं कम होंगी। इरान के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि वे संयुक्त अरब अमीरात, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ एक व्यापक समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसमें प्रतिबंधों का हवाला, परमाणु कार्यक्रम की निगरानी और मध्य पूर्व में स्थिरता को लेकर कई मुद्दे शामिल हैं। दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों, रॉयटर और एपी न्यूज़ के अनुसार, इस समझौतापूर्ण प्रक्रिया में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य के खोलने को लेकर बातचीत काफी हद तक तय हो चुकी है और अब केवल तकनीकी विवरणों को समाप्त करना शेष है। वहीं, इरान के पक्ष ने यह भी कहा कि यदि शर्तें मंज़ूर हो जाती हैं, तो इरान को सीधे उस जलडमरूमध्य के आयाम को नियंत्रण में ले लेना होगा, जिससे सभी अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बिना किसी प्रतिबंध के गुजरने की सुविधा मिलेगी। यह प्रस्ताव तेल बाजार में आशा की लहर लाता है, लेकिन साथ ही कई देशों की चिंताएं भी बढ़ाता है। इसी बीच, वित्तीय टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि इरान द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव में आर्थिक राहत, तेल निर्यात की अनुमति और पश्चिमी देशों के साथ व्यापारिक समझौते की संभावनाएं शामिल हैं। इस प्रस्ताव में इरान ने प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार अपने परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने का वादा किया है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रस्ताव सिर्फ एक रणनीतिक कदम है, जिसका उद्देश्य इरान की आर्थिक स्थिति को सुधारा जाना है, जबकि सतही तौर पर शांति की दिशा में कदम बढ़ाने का दिखावा किया गया है। नडटवी की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ अमेरिकी अधिकारी इस पहल को "गढ़ा हुआ" बताकर खारिज कर रहे हैं, और इरान को फिर से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए सख्त जांच और साक्षी‑साक्ष्य प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। इस बीच, ओमान, तुर्की और कतर जैसे मध्य-प्रारम्भिक देशों ने कहा है कि वे इस समझौते को साकार करने में मध्यस्थता करने को तैयार हैं, क्योंकि उनका आर्थिक हित इस जलडमरूमध्य के सुचारु संचालन में निहित है। समग्र रूप से यह कहा जा सकता है कि इरान का यह बयान और आगामी शर्तें पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र में हैं। यदि वार्ता सफल होती है, तो न केवल तेल की कीमतें स्थिर होंगी, बल्कि मध्य-पूर्व के शांतिपूर्ण भविष्य की नींव भी मजबूत होगी। अन्यथा, यदि शर्तें अस्वीकृत या अधूरी रह गईं, तो होरमुज जलडमरूमध्य पर फिर से प्रतिबंध लग सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ेगा और आर्थिक अस्थिरता को और गहराई मिल सकती है।