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Breaking News: तमिलनाडु में गोरु वध पर तुरंत प्रतिबंध: मदरास हाई कोर्ट का निर्णायक आदेश
🕒 3 days ago

तमिलनाडु का न्यायालय एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गोरु वध पर तत्काल रोक लगा रहा है। मदरास हाई कोर्ट ने अपने विशेष आदेश में बताया कि बकरीद त्यौहार के दौरान भी गोरु वध न केवल धार्मिक अनिवार्य नहीं है, बल्कि भारतीय कानून के सिद्धांतों के विरुद्ध है। कोर्ट ने कहा कि गौ के साथ-साथ उसके बछड़े को मारना प्राकृतिक संवेदनशीलता के खिलाफ है और इससे समाज में पशु क्रूरता का माहौल बनता है। इस निर्णय के बाद तमिलनाडु के सभी अधीकृत क्षेत्रों में गोरु वध को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है, चाहे वह वैध कारणों से हो या त्यौहार के कारण। कोर्ट ने अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि इस प्रतिबंध का उद्देश्य न केवल पशु संरक्षण को सुदृढ़ करना है, बल्कि सामाजिक व सांस्कृतिक विविधताओं को एक साथ सम्मानित करना भी है। बकरीद के दौरान गोरु वध को अनिवार्य मानने वाले कुछ धार्मिक समूहों को बताया गया कि इस प्रक्रिया को छोड़कर वैकल्पिक बलिदान की विधि अपनाई जा सकती है। इस प्रकार, अदालत ने धार्मिक स्वतंत्रता को बरकरार रखते हुए भी पशु अधिकारों को प्राथमिकता दी है। तमिलनाडु सरकार को तुरंत इस आदेश को लागू करने के लिए सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देशित किया गया है। वन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहते हुए किसी भी प्रकार के गोरु वध की घटनाओं पर कड़ी रोकथाम और सख्त कार्रवाई करने का आवाहन किया गया है। साथ ही, सरकार ने कहा कि इस नई नीति के उल्लंघन पर सख्त दंड निर्धारित किया जाएगा, जिससे सामाजिक अराजकता को रोका जा सके। इस फैसले को कई सामाजिक संगठनों ने सराहा है, लेकिन कुछ धार्मिक समूहों ने अभी भी इस पर सवाल उठाया है। फिर भी, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि धार्मिक ग्रंथों में गोरु का बलिदान अनिवार्य नहीं बताया गया है, और इस दिशा में वैज्ञानिक एवं सामाजिक तर्कों का समर्थन है। कुल मिलाकर, यह निर्णय भारत के कई प्रदेशों में चल रही गोरु संरक्षण की गति को तेज करेगा और धार्मिक सहयोगी भी इस नीति को अपनाने की अपेक्षा रखी जाएगी। निष्कर्षतः, मदरास हाई कोर्ट का यह आदेश तमिलनाडु में पशुकल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन बन गया है। यह न केवल गोरु वध को रोकता है, बल्कि सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द को भी बढ़ावा देता है। आगे चलकर यह देखना होगा कि राज्य के विभिन्न विभाग इस आदेश को कितनी प्रभावी ढंग से लागू करते हैं और समाज इस नई नीति को किस हद तक अपनाता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 May 2026