जिला अदालत में दहेज के कारण हत्या के गंभीर आरोपों से घिरा मामला फिर एक मोड़ ले रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में विवाहित पति समरथ सिंह ने अपने anticipatory bail की याचिका को वापस ले लिया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव आया है। यह कदम तब आया जब दोशेज़ बुजुर्गों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की सभी औपचारिकताओं को पुनः जांचने की मांग की थी। यह घटना तब प्रकाश में आई जब दो महीने से अधिक समय तक छुपे हुए पति ने झाबलपुर के मुख्य कोर्ट में आत्मसमर्पण किया और वहीं से सूचना मिली कि वह अपनी याचिका वापस ले रहा है। तविशा शर्मा, जिनकी 2023 में दहेज की मांग को लेकर घर में उत्पीड़न का शिकार हुई थी, को उसी वर्ष कोड रूप में मिली ताबड़-तोड़ मृत्यु के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठ खड़ा हुआ। प्रारम्भ में परिवार ने बताया कि पति ने गले में धातु की जंजीर डालकर उसे मार गिराया, जिससे कई ने इसे दहेज हत्या का मामला ठहराया। इसके बाद अपराधी के खिलाफ दो पोस्टमॉर्टम रिपोर्टें दर्ज की गईं, जिनमें पहली रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने दर्जा स्पष्ट नहीं होने का संकेत दिया। लेकिन दूसरी रिपोर्ट, जो परिवार की मांग पर की गई, ने फिर से हत्या के संदेह को स्पष्ट किया। अब इस परिप्रेक्ष्य में समरथ सिंह ने anticipatory bail का अनुरोध वापस लेते हुए कहा कि वह न्याय प्रक्रिया का सम्मान करेगा और न्यायालय के सामने अपना इनकार नहीं करेगा। इस कदम को सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सकारात्मक माना, क्योंकि इस प्रकार से अभियुक्त को यह अवसर नहीं मिलेगा कि वह विभिन्न कानूनी तकनीकों से बच सके। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने भी इस याचिका के वापस लेने पर नोटिस जारी किया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि न्यायिक प्राधिकरण अब पूरी तरह से तथ्यों की जांच पर केन्द्रित रहेगा। कुल मिलाकर, यह घटना दहेज हत्या के खिलाफ समाज में चल रहे संघर्ष का प्रतीक बन गई है। कई संगठनों ने दहेज के खिलाफ कड़े कानूनों की मांग की है और कहा है कि इस तरह के मामलों में तेज़ और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। इस बीच, तविशा के परिवार ने न्याय के लिये लड़ाई जारी रखी है और आशा व्यक्त की है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए नीति स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।