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Breaking News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने AIIMS दिल्ली को किया दूसरा पोस्ट‑मॉर्टेम, ट्विशा शर्मा के दहेज हत्या मामले में नया मोड़
🕒 5 hours ago

मध्य प्रदेश की हाई कोर्ट ने हाल ही में ट्विशा शर्मा दहेज हत्या मामले में एक अहम फैसला सुनाया। आरोपी पति समरथ सिंह के खिलाफ दायर कई अभियोजन प्रक्रिया के बीच कोर्ट ने AIIMS दिल्ली की टीम को पुनः पोस्ट‑मॉर्टेम करने का आदेश दिया। यह आदेश तभी जारी किया गया जब पहली पोस्ट‑मॉर्टेम रिपोर्ट में मिलने वाले प्रमाणों और गवाहियों में कई खामियां सामने आईं, जिससे न्याय की सटीकता को लेकर प्रश्न उठे। रिपोर्ट में दिखे संकेतों की विस्तृत जांच के लिए AIIMS की विशेषज्ञ टीम को पुनः बुलाया गया, ताकि शव के अंदर पाई गई चोटों, रक्तस्राव और जख्मों की वास्तविक कारणों का स्पष्ट चित्र मिल सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नई पोस्ट‑मॉर्टेम रिपोर्ट में दहेज लेन‑देन या पति द्वारा बंधक हत्या के संकेत मिले, तो आरोपी पर कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी। इस बीच, समरथ सिंह ने 10 दिन बाद जबलपुर के जिला कोर्ट में आत्मसमर्पण किया, लेकिन अदालत ने उनकी प्रत्याशित जेल बंधन की दलील को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने पहले हिरासत में रहने के दौरान कई बार जमानत की मांग की थी, पर अब कोर्ट ने उनके बंधक बंधन को जारी रखा है, क्योंकि मामला अत्यंत संवेदनशील और सामाजिक महत्व का माना जा रहा है। दूसरी ओर, कई सामाजिक संगठनों और महिलाओं के अधिकारों की समूहों ने इस मामले पर कड़ी निंदा की है और दहेज प्रथा के खिलाफ सख्त कानूनों के कार्यान्वयन की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के मामलों में न्याय नहीं मिलेगा, तो महिलाओं की सुरक्षा में व्यापक संकट उत्पन्न होगा। इस संदर्भ में मध्य प्रदेश सरकार ने भी घोषणा की कि वह इस मामले को और गहराई से जांचने के लिए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपने पर विचार कर रही है। यह कदम न सिर्फ न्याय की मांग को बल देगा, बल्कि दहेज के अंतर्गत होने वाले कई अन्य अत्याचारों को भी रोकने में सहायक सिद्ध हो सकता है। न्यायालय की यह कार्रवाई यह स्पष्ट संकेत देती है कि दहेज हत्या जैसे गम्भीर अपराधों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब सभी आंखें AIIMS दिल्ली की नई पोस्ट‑मॉर्टेम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि ट्विशा शर्मा की मृत्यु वास्तव में दहेज से जुड़ी है या नहीं। इस चरण में यदि सच्चाई सामने आती है, तो यह न केवल आरोपी को कड़ी सजा दिलाएगा, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भेजेगा। अंततः इस मामले का निष्कर्ष यह तय करेगा कि भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून कितने कड़े और प्रभावी हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 22 May 2026