पंजाब के एक नागरिक को जासूसी के गंभीर आरोप में पुलिस ने आज गिरफ्तार किया। जांच के अनुसार, इस आरोपी ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर सीसीटीवी कैमरा स्थापित किया और भारतीय सेना की चलन‑फिरन की लाइव फीड को पाकिस्तान के हैंडलरों को भेजा। यह घटना तब उजागर हुई जब स्थानीय पुलिस ने अनधिकृत कैमरों की बदहाली रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू की और गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का पता चला। जांचकर्ता बताते हैं कि आरोपी ने अपने निजी वाहन में एक छोटा डिश एंटेना और कैमरा लगाया, जिससे वह सड़कों पर गुजरती सेना वाहनों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकता था। इन फुटेज को वाई-फाई और मोबाइल डेटा के जरिये पाकिस्तान के शहरी इलाकों में स्थित कुछ संगठनों को ट्रांसमिट किया जाता था। पुलिस की रिपोर्ट में उल्लेख है कि इस प्रकार की सूचना को दुश्मन के हाथों में पहुँचाने से सीमापार सुरक्षा खतरे में पड़ सकते हैं, क्योंकि इससे प्रतिद्वंद्वी सेना को हमारी गठित योजनाओं और चलन‑फिरन की जानकारी मिल सकती है। इसी बीच, राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत सर्वेक्षण चलाया। शुरुआती जांच से पता चला कि आरोपी ने कई महीनों तक नियमित रूप से इस कैमरा से ली गई फुटेज को एन्क्रिप्टेड फाइलों में बदल कर इंटरनेट के माध्यम से पाकिस्तान के हैन्डलरों को भेजा। उस दौरान, भारतीय सेना ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में घुमावदार रूट्स अपनाए थे, जिन्हें इस जासूसी नेटवर्क द्वारा उजागर किया जा रहा था। पुलिस ने घटना स्थल से बंदी को अलग‑अलग स्थानों पर स्थापित कई कैमरों के प्रूफ भी जब्त किए हैं। आरोपियों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत दायज किया गया है और अदालत में पेश किया जाएगा। इस प्रकार की जासूसी सक्रियता को रोकने के लिए सरकार ने अधिकारियों को सतर्क रहने की हिदायत दी है और सभी सार्वजनिक स्थलों पर कैमरों की अनुमति प्राप्त करने के कड़े नियमों को लागू करने का संकेत दिया है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के अंधेरे कोनों में भी जासूसियों की गतिविधियां चल रही हैं और हमें सतर्क रहना आवश्यक है।