इज़राइल ने इराक के रेगिस्तानी इलाकों में एक गुप्त सैन्य ठहराव स्थापित किया, जिससे इराकी सेना को दूरी पर रहने के लिये मारपीट की गई, यह जानकारी कई अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों ने रिपोर्ट की है। इस छिपे हुए बेस का मुख्य उद्देश्य इरान के खिलाफ हवाई तथा जमीनी ऑपरेशन्स को समर्थन देना था, जिससे इज़राइल को रणनीतिक लाभ मिल सके। रिपोर्टों के अनुसार, इस बुनियादी ढाँचे को बनाते समय इज़राइल ने अत्याधुनिक सर्वेक्षण तकनीक, रडार और संचार उपकरण स्थापित किए, जो इराक के सीमावर्ती क्षेत्रों में आसानी से पहचाने नहीं जा सके। इस ठहराव को इज़राइल ने "सुरक्षा और संचालन का गोपनीय केन्द्र" कहा है, जबकि इराकी अधिकारियों ने इसे अपने स्वतंत्रता के खिलाफ एक बड़ा खतरा माना है। गुप्त बेस की स्थापना के बाद, इज़राइल ने इराकी सैनिकों को बंधक बनाने या उनके हटाने के लिये कई हवाई हमले भी किए। ये हमले अक्सर कम प्रभावी दिखते थे, लेकिन उनका उद्देश्य इराकी सेनाओं को बेस के निकट रहने से रोकना था। कई गवाहों के अनुसार, इज़राइल के F-35 और ड्रोन ने रात के अंधेरे में बेस के आसपास इराकी टैंक और काफिले को निशाना बनाया, जिससे स्थानीय फौजों में भय और असहजता का माहौल बना। इस प्रकार इज़राइल ने अपनी सैन्य मौजूदगी को दशक भर के तनावपूर्ण संबंधों में एक नया स्तर दिया। इज़राइल की इस कार्रवाई से मध्य पूर्व में रणनीतिक समीकरण बदल रहा है। इरान, जो अपनी गति से प्रतिशोधी कार्रवाई की तैयारी में लगा है, इस बात को लेकर चिंतित है कि उसके प्रतिद्वंद्वी ने इराक के अंदर गुप्त आधार स्थापित करके उसे एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक बल बिंदु बना दिया है। इज़राइल के इस कदम से न केवल इराकी सरकार पर दबाव बढ़ा है, बल्कि फार्बेन, सऊदी अरब और संयुक्त राज्य जैसे प्रमुख हितधारकों के बीच भी तनाव बढ़ा है। कई विशेषज्ञ इज़राइल को ऐसा कदम उठाने के पीछे कर रहे हैं कि इराक को अपने क्षेत्रों में इरानी प्रभाव को सीमित किया जा सके और अपने स्वयं के सुरक्षा लक्ष्य को साकार किया जा सके। आरंभिक रिपोर्टों का उल्लेख है कि इस बेस का निर्माण इज़राइल के गुप्त खुफिया एजेंसियों, यानी मोसाद और सैन्य कमांड द्वारा किया गया था। यह भी बताया गया कि बेस की सुरक्षा को दो-स्तरीय प्रणाली से सुदृढ़ किया गया था: सतही स्तर पर वायुमार्ग निगरानी तथा गहरी स्तर पर भूमिगत बंकर। इज़राइल ने कहा है कि यह ठहराव केवल संक्षिप्त अवधि के लिये है और उसकी मुख्य भूमिका इज़राइल-इरान संघर्ष में त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करना है। निष्कर्षतः, इज़राइल द्वारा इराक में बनाये गये इस गुप्त बेस ने क्षेत्रीय सुरक्षा की धुंध को और अधिक जटिल बना दिया है। इराकी सेना को इसके आसपास की सीमाओं में चलना कठिन हो गया है, जबकि इरान को नए खतरे का सामना करना पड़ रहा है। यह घटना दर्शाती है कि मध्य पूर्व में गुप्त सैन्य ठिकानों का उपयोग, अंतरराष्ट्रीय कानून और राष्ट्र-राष्ट्र के बीच संबंधों को पुनः परिभाषित कर रहा है। आगे की स्थिति यह तय करेगी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस प्रकार की गुप्त रणनीति को कितनी सख्ती से नियंत्रित या स्वीकार्य मानता है।