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Breaking News: टीवीके के विजय को सशक्त गठबंधन: कांग्रेस‑सीपीआई, सीपीआई(एम) के बीच गठजोड़ की दुविधा
🕒 2 hours ago

तमिलनाडु के प्रशासकीय राजनीति में इस साल एक बड़ा मोड़ आया है, जब टिवी के अध्यक्ष वी.के. विजय ने कांग्रेस और सीपीआई(एम) दोनों से संवाद स्थापित करने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) का समर्थन प्राप्त करने का प्रयास किया। इस कदम ने तमिलनाडु की राजनीति को नए समीकरण में बदल दिया है। कांग्रेस ने विजय को अपना समर्थन देने के साथ एक शर्त रखी – "कोई साम्प्रदायिक बल गठबंधन में नहीं होगा"। इस शर्त ने सीपीआई और सीपीआई(एम) दोनों को एक कठिन स्थिति में डाल दिया, क्योंकि दोनों ही पार्टियों की वैचारिक जड़ें और सामाजिक आधारभूत संरचनाएँ अलग-अलग हैं। पहले चरण में, कांग्रेस ने विजय के पक्ष में एक घोटाले-मुक्त, विकास‑प्रधान सरकार का वादा किया और उसे अपने गठबंधन में शामिल करने के लिए तैयार हुई। इस बीच, सीपीआई(एम) ने भी विजय को एक संभावित गठबंधन साथी के रूप में देखा, लेकिन इसकी वैचारिक शुद्धता और साम्प्रदायिकता के प्रति सतर्कता के कारण उसकी सहयोग की संभावना पर सवाल उठाए। इस दुविधा को सुलझाने के लिए विजय ने सीपीआई से सीधे संपर्क किया और उनसे समर्थन की उम्मीद जताई, यह संकेत देते हुए कि वह एक व्यापक और विविध गठबंधन बनाना चाहता है जिसमें सभी सामाजिक वर्गों की आवाज़ें शामिल हों। सीपीआई ने कांग्रेस के साथ विजय के गठजोड़ को लेकर सावधानी बरतती हुई कहा कि यदि वैध शर्तें पूरी होती हैं, तो वह सहयोग करने के लिए तैयार है। हालांकि, यह समर्थन बिना किसी साम्प्रदायिक दबाव के, विकास और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर केन्द्रित रहेगा। इस पर तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने कांग्रेस की ओर से इस गठबंधन को "बैकस्टैबर्स" कहा, और कांग्रेस के इस कदम को विरोध किया, यह दावा करते हुए कि यह छोटे दलों को झुठला कर बड़े दलों के हाथों में शक्ति को केंद्रित कर रहा है। विजय की सफलता के साथ ही यह प्रश्न उठता है कि क्या वह अपने गठबंधन को स्थायी बना पाएगा। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में, कई विश्लेषकों ने कहा कि विजय को एक स्थिर गठबंधन बनाने की आवश्यकता है, जिसमें विभिन्न वर्गों के समर्थन को मिलाकर वह सत्ता में बने रहने की राह पक्का कर सके। इस संदर्भ में, विभिन्न मीडिया स्रोतों ने बताया कि विजय का एक मजबूत नेतृत्व और विभिन्न दलों के बीच संतुलन स्थापित करने की कोशिशें ही भविष्य में उसकी सरकार को संभालने की कुंजी होंगी। अंत में, यह स्पष्ट है कि तमिलनाडु की राजनीति में अब दलों के बीच सहयोग, समझौते और शर्तों की जटिल धागे बुन रहे हैं। विजय ने जब कांग्रेस और सीपीआई दोनों से समर्थन की माँग की, तो यह संकेत मिला कि वह एक व्यापक और समावेशी सरकार बनाना चाहता है, लेकिन यह प्रक्रिया कई चुनौतियों और विरोधों से भरी हुई है। यह देखना बाकी है कि गठबंधन की शर्तें और सामाजिक समीकरण कैसे विकसित होते हैं, और क्या विजय की टी.वी.के. वास्तव में एक स्थिर और प्रभावी शासक बन पाएगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 06 May 2026