विश्व के प्रमुख वित्तीय सूचकांकों में से एक निफ़्टी, कल के सत्र की शुरुआत 24,000 अंक के नीचे करने की संभावना बना रहा है। इस आशंका का प्रमुख कारण मध्य पूर्व में हाल ही में हुए दो मिसाइल हमले हैं, जिनमें एक अमेरिकी युद्धपोत को होर्मुज़ जलडमरूमध्य में निशाना बनाया गया। यह जलडमरूमध्य विश्व के सबसे व्यस्त तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहाँ पर किसी भी विवाद या असुरक्षा के संकेत से तेल की कीमतें तत्काल बढ़ जाती हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में बेचैनी उत्पन्न होती है। होर्मुज़ में हुई इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में ब्रेंट केमिकल की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं। तेल की कीमतों में इस उछाल ने भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के मन में जोखिम का भाव पैदा कर दिया है, जिसके कारण इक्विटी में पूँजी की प्रवाह में कमी आई है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नौसेना ने बताया कि उसने इस हड़ताल को रोकने के लिए छह छोटे इरानी नावों को नष्ट कर दिया और कई मिसाइल व ड्रोन को भी गिरा दिया, जिससे इस क्षेत्र में तनाव का स्तर और बढ़ गया है। यह सब मिलकर बाजार के माहौल को नकारात्मक दिशा में धकेल रहा है। भारतीय बाजार में निफ़्टी के नीचे 24,000 अंक से शुरू होने की संभावना को देखते हुए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए। जोखिम‑प्रेमी निवेशकों के लिए छोटे‑मॉड्यूल वाले लाभकारी विकल्पों को प्राथमिकता देना और उच्चतम अस्थिरता वाले स्टॉक्स की स्थिति को पुनः मूल्यांकन करना उचित रहेगा। साथ ही, विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी अस्थिरता के संकेत दिख रहे हैं, इसलिए पूँजी संरक्षण के लिए बचत खाते और बॉन्ड जैसी कम जोखिम वाली संपत्तियों पर भी विचार किया जा सकता है। निष्कर्षतः, होर्मुज़ में हुए इस मिसाइल हमले ने न केवल वैश्विक तेल आपूर्ति को नियन्त्रित किया है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार के लिए भी चेतावनी दी है। निफ़्टी के 24,000 अंक से नीचे खुले रहने की संभावना के बीच निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और अपने पोर्टफ़ोलियो को विविधीकृत करके जोखिम को सीमित करने की आवश्यकता है। इस प्रकार, बाजार में उद्भवते अतिरिक्त अनिश्चितताओं के बीच समझदारी से निर्णय लेना ही सुरक्षित निवेश का मूलमंत्र रहेगा।