भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हालिया फैसले में यह स्पष्ट कर दिया कि ऑनलाइन खेलों में पैसा लगाकर खेलने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इस वजह से तमिलनाडु और कर्नाटक राज्य में लागू किए गए ऑनलाइन जुए पर प्रतिबंध को पूरी तरह से समर्थन दिया गया। कोर्ट ने यह तर्क दिया कि इन खेलों को शुद्ध कौशल के आधार पर नहीं बल्कि सट्टेबाजी के रूप में माना जाना चाहिए, इसलिए इन्हें मौलिक अधिकारों के दायरे में नहीं लाया जा सकता। यह निर्णय न केवल दो राज्यों के मौजूदा नियमों को कायम रखता है, बल्कि पूरे...
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